जमीनी विवाद को लेकर दो पक्ष भिड़े, दो महिलाओं समेत बच्चा घायल...
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मथुरा। श्री रामलीला सभा मथुरा के तत्वावधान में रामलीला का मंचन प्रतिदिन किया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार देर शाम श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित लीला मंच पर श्रीराम जन्म लीला, बधाई गायन एवं छप्पन भोग का भव्य आयोजन किया गया।
लीला के दौरान दिखाया गया कि चक्रवर्ती सम्राट अयोध्या नरेश राजा दशरथ ने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के परामर्श पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ के फलस्वरूप महारानी कौशल्या के यहां भगवान श्रीराम, महारानी कैकेयी के यहां भरत तथा महारानी सुमित्रा के यहां लक्ष्मण और शत्रुघ्न का अवतरण हुआ।
चारों राजकुमारों के जन्म से अयोध्या में खुशियों का माहौल छा गया। राजा दशरथ ने राजकोष से धन एवं उपहार बांटे। अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे और नृत्य करने लगे। राजमहल में ढाड़ी, ढाड़िन एवं भांडों द्वारा बधाई स्वरूप सामूहिक गायन और नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों का नामकरण संस्कार कराया गया।
इस अवसर पर लीला मंच पर मनभावन छप्पन भोग का आयोजन भी किया गया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बाल स्वरूपों को छप्पन भोग अर्पित किए गए। आकर्षक ढंग से सजाए गए छप्पन भोग को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया।
रामजन्म लीला एवं छप्पन भोग के दौरान श्री रामलीला सभा के नीति निदेशक गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, जयन्ती प्रसाद अग्रवाल, जुगल किशोर अग्रवाल, नन्दकिशोर अग्रवाल, मूलचन्द गर्ग, प्रदीप सर्राफ पी.के., विजय सर्राफ किरोड़ी, शैलेश अग्रवाल सर्राफ, अजय मास्टर, पं. शशांक पाठक सहित रामलीला सभा के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
भगवान श्रीराम के जन्म की लीला के मंचन के दौरान पूरा लीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
मथुरा। श्री रामलीला सभा मथुरा के तत्वावधान में रामलीला का मंचन प्रतिदिन किया जा रहा है। इसी क्रम में मंगलवार देर शाम श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित लीला मंच पर श्रीराम जन्म लीला, बधाई गायन एवं छप्पन भोग का भव्य आयोजन किया गया। लीला के दौरान दिखाया गया कि चक्रवर्ती सम्राट अयोध्या नरेश राजा दशरथ ने कुलगुरु महर्षि वशिष्ठ के परामर्श पर पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ के फलस्वरूप महारानी कौशल्या के यहां भगवान श्रीराम, महारानी कैकेयी के यहां भरत तथा महारानी सुमित्रा के यहां लक्ष्मण और शत्रुघ्न का अवतरण हुआ। चारों राजकुमारों के जन्म से अयोध्या में खुशियों का माहौल छा गया। राजा दशरथ ने राजकोष से धन एवं उपहार बांटे। अयोध्यावासी खुशी से झूम उठे और नृत्य करने लगे। राजमहल में ढाड़ी, ढाड़िन एवं भांडों द्वारा बधाई स्वरूप सामूहिक गायन और नृत्य प्रस्तुत किया गया। इसके बाद गुरु वशिष्ठ द्वारा चारों भाइयों का नामकरण संस्कार कराया गया। इस अवसर पर लीला मंच पर मनभावन छप्पन भोग का आयोजन भी किया गया। भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के बाल स्वरूपों को छप्पन भोग अर्पित किए गए। आकर्षक ढंग से सजाए गए छप्पन भोग को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। रामजन्म लीला एवं छप्पन भोग के दौरान श्री रामलीला सभा के नीति निदेशक गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी, जयन्ती प्रसाद अग्रवाल, जुगल किशोर अग्रवाल, नन्दकिशोर अग्रवाल, मूलचन्द गर्ग, प्रदीप सर्राफ पी.के., विजय सर्राफ किरोड़ी, शैलेश अग्रवाल सर्राफ, अजय मास्टर, पं. शशांक पाठक सहित रामलीला सभा के अन्य पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भगवान श्रीराम के जन्म की लीला के मंचन के दौरान पूरा लीला परिसर जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
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