जमीनी विवाद को लेकर दो पक्ष भिड़े, दो महिलाओं समेत बच्चा घायल...
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी उद्देश्य से प्रदेश और जनपद स्तर पर टीबी वॉलंटियर्स तैयार किए जा रहे हैं। इन वॉलंटियर्स को गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने, बीमारी के लक्षणों की पहचान करने और समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं।
इसी क्रम में मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल स्थित टीबी विभाग में टीबी उन्मूलन अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्क्रीन के माध्यम से वॉलंटियर्स को टीबी से बचाव, लक्षणों की पहचान, जांच और उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही अभियान को प्रभावी बनाने के लिए उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स, समाजसेवी, सेना के जवान और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग शामिल हुए। सभी से अपील की गई कि वे समाज में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने और मरीजों को समय पर जांच एवं उपचार उपलब्ध कराने में सहयोग करें।
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ टीबी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर टीबी की पहचान और पूरा उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। ऐसे में किसी व्यक्ति को लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन कम होने या रात में पसीना आने जैसी समस्या हो तो उसे तत्काल जांच करानी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत वर्ष 2030 तक देश को टीबी मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। इसी उद्देश्य से प्रदेश और जनपद स्तर पर टीबी वॉलंटियर्स तैयार किए जा रहे हैं। इन वॉलंटियर्स को गांव-गांव और घर-घर जाकर लोगों को टीबी के प्रति जागरूक करने, बीमारी के लक्षणों की पहचान करने और समय पर जांच एवं उपचार के लिए प्रेरित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल स्थित टीबी विभाग में टीबी उन्मूलन अभियान को लेकर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में स्क्रीन के माध्यम से वॉलंटियर्स को टीबी से बचाव, लक्षणों की पहचान, जांच और उपचार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही अभियान को प्रभावी बनाने के लिए उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए। कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट्स, समाजसेवी, सेना के जवान और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोग शामिल हुए। सभी से अपील की गई कि वे समाज में टीबी को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने और मरीजों को समय पर जांच एवं उपचार उपलब्ध कराने में सहयोग करें। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ टीबी रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने टीबी के लक्षण, बचाव और उपचार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। चिकित्सकों ने बताया कि समय पर टीबी की पहचान और पूरा उपचार मिलने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। ऐसे में किसी व्यक्ति को लंबे समय से खांसी, बुखार, वजन कम होने या रात में पसीना आने जैसी समस्या हो तो उसे तत्काल जांच करानी चाहिए।
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