गोविंद नगर पुलिस ने शातिर चोरी गैंग का किया भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार...
- 18h ago
हरियाणा के रोहतक जिले की एक गेस्ट टीचर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस छिड़ गई है।
निलंबित शिक्षिका सुलेखा दलाल सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में वह जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुई थीं, जहां उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया।
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निलंबन आदेश में कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों के उल्लंघन के चलते कार्रवाई की गई है। वहीं शिक्षिका का कहना है कि वह किसी राजनीतिक संगठन की सदस्य नहीं हैं और प्रदर्शन में केवल एक चिंतित अभिभावक के रूप में शामिल हुई थीं।
सुलेखा दलाल का दावा है कि उनके बेटे सहित कई युवाओं को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का सामना करना पड़ा, इसलिए उन्होंने अपनी आवाज उठाई। उनका कहना है कि निलंबन से पहले उन्हें कारण बताने का अवसर भी नहीं दिया गया।
इस घटना ने सरकारी कर्मचारियों के विरोध-प्रदर्शन में भाग लेने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सेवा नियमों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल यह मामला हरियाणा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
हरियाणा के रोहतक जिले की एक गेस्ट टीचर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित CJP (Cockroach Janta Party) के प्रदर्शन में शामिल होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद मामला चर्चा का विषय बन गया है और सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर बहस छिड़ गई है। निलंबित शिक्षिका सुलेखा दलाल सरकारी स्कूल में गेस्ट टीचर के रूप में कार्यरत हैं। हाल ही में वह जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल हुई थीं, जहां उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी थी। प्रदर्शन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी निलंबन आदेश में कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों के आचरण नियमों के उल्लंघन के चलते कार्रवाई की गई है। वहीं शिक्षिका का कहना है कि वह किसी राजनीतिक संगठन की सदस्य नहीं हैं और प्रदर्शन में केवल एक चिंतित अभिभावक के रूप में शामिल हुई थीं। सुलेखा दलाल का दावा है कि उनके बेटे सहित कई युवाओं को भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का सामना करना पड़ा, इसलिए उन्होंने अपनी आवाज उठाई। उनका कहना है कि निलंबन से पहले उन्हें कारण बताने का अवसर भी नहीं दिया गया। इस घटना ने सरकारी कर्मचारियों के विरोध-प्रदर्शन में भाग लेने, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सेवा नियमों के बीच संतुलन को लेकर नई बहस छेड़ दी है। फिलहाल यह मामला हरियाणा और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
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