गोविंद नगर पुलिस ने शातिर चोरी गैंग का किया भंडाफोड़, 4 गिरफ्तार...
- 18h ago
देश में बढ़ते साइबर अपराध के बीच दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक ऐसे संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने मुंबई की एक कंपनी के CEO समेत कई लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ठग खुद को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी सहयोगी या परिचित बताकर व्हाट्सएप मैसेज और कॉल के जरिए संपर्क करते थे। इसके बाद वे तत्काल भुगतान या वित्तीय लेन-देन का दबाव बनाकर पीड़ितों से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर भेजकर उसका स्रोत छिपाता था।
जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि यह नेटवर्क केवल दिल्ली या मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई राज्यों और विदेशी साइबर ठगी नेटवर्क से भी जुड़े हुए हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग कर लोगों को अपना शिकार बना रहे थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके वित्तीय नेटवर्क की तलाश में जुटी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल साइबर अपराधी कंपनियों के अधिकारियों की प्रोफाइल, सोशल मीडिया गतिविधियों और व्यावसायिक जानकारी जुटाकर बेहद योजनाबद्ध तरीके से ठगी कर रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि बिना किए भुगतान करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्हाट्सएप कॉल, मैसेज या भुगतान संबंधी निर्देश पर तुरंत भरोसा न करें और सत्यापन के बाद ही कोई लेन-देन करें।
देश में बढ़ते साइबर अपराध के बीच दिल्ली पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने एक ऐसे संगठित साइबर फ्रॉड सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जिसने मुंबई की एक कंपनी के CEO समेत कई लोगों को निशाना बनाकर लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। जांच के दौरान पुलिस ने गिरोह से जुड़े कई आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से मोबाइल फोन, बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज तथा अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, ठग खुद को कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी, कारोबारी सहयोगी या परिचित बताकर व्हाट्सएप मैसेज और कॉल के जरिए संपर्क करते थे। इसके बाद वे तत्काल भुगतान या वित्तीय लेन-देन का दबाव बनाकर पीड़ितों से रकम अपने खातों में ट्रांसफर करा लेते थे। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह फर्जी बैंक खातों और शेल कंपनियों के जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर भेजकर उसका स्रोत छिपाता था। जांच के दौरान पुलिस ने पाया कि यह नेटवर्क केवल दिल्ली या मुंबई तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार कई राज्यों और विदेशी साइबर ठगी नेटवर्क से भी जुड़े हुए हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप और डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं का दुरुपयोग कर लोगों को अपना शिकार बना रहे थे। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके वित्तीय नेटवर्क की तलाश में जुटी है। विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल साइबर अपराधी कंपनियों के अधिकारियों की प्रोफाइल, सोशल मीडिया गतिविधियों और व्यावसायिक जानकारी जुटाकर बेहद योजनाबद्ध तरीके से ठगी कर रहे हैं। ऐसे मामलों में किसी भी वित्तीय निर्देश की पुष्टि बिना किए भुगतान करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध व्हाट्सएप कॉल, मैसेज या भुगतान संबंधी निर्देश पर तुरंत भरोसा न करें और सत्यापन के बाद ही कोई लेन-देन करें।
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