कोसीकलां मंडी में 17 लाख की धान खरीदकर व्यापारी फरार, करोड़ों की ठगी का आरोप
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प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब रोडवेज विभाग की ग्रामीण परिवहन सेवाओं में प्राइवेट बसों को शामिल किए जाने की योजना सामने आई है। इस फैसले के बाद परिवहन व्यवस्था के निजीकरण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रदेश सरकार की मंशा ग्रामीण अंचलों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय से बेहतर तरीके से जोड़ने की है। इसी के तहत 27 सीटर प्राइवेट बसों के संचालन की व्यवस्था की जा रही है।
इन बसों के जरिए निजी वाहन चालक रोडवेज बस स्टैंड से यात्रियों को ग्रामीण क्षेत्रों तक ले जा सकेंगे। इसके बदले उन्हें प्रति माह लगभग 1500 रुपये का शुल्क जमा करना होगा।
मथुरा डिपो की बात करें तो यहां अब तक लगभग 30 बस चालकों के आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार, ये 27 सीटर बसें 27 अप्रैल से ग्रामीण रूटों पर संचालित की जा सकती हैं।
इस संबंध में चीफ अकाउंटेंट जयप्रकाश शुक्ला ने बताया कि प्राइवेट बस चालक रोडवेज बस स्टैंड से यात्रियों को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के लिए रवाना होंगे। इन बसों की आय सीधे चालक और परिचालक के पास जाएगी, जबकि संचालन पूरी तरह निजी हाथों में होगा।
हालांकि इस व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं कि यदि निजी बसें रोडवेज स्टैंड से संचालन करेंगी, तो निगम की बसों की भूमिका क्या होगी। साथ ही यह भी चिंता जताई जा रही है कि कहीं निजी वाहन चालक मनमाना किराया वसूलकर यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ न डाल दें।
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