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रविवार को भूतेश्वर स्थित अति प्राचीन श्री बद्रीनाथ मंदिर में अक्षय तृतीया का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह से ही मंदिर परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला शुरू हो गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रातःकाल भगवान ठा. बद्रीनाथ महाराज के पंचामृत अभिषेक से हुई। वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ किए गए इस अभिषेक ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। इसके बाद भगवान को चंदन का लेप और इत्र अर्पित किया गया, जिसकी सुगंध से मंदिर परिसर महक उठा और श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए।
दिनभर श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान के दर्शन करते रहे और पुण्य लाभ अर्जित किया। भक्तों की आस्था का आलम यह था कि पूरे दिन मंदिर में दर्शनार्थियों की भीड़ बनी रही।
शाम के समय मंदिर में विशेष आकर्षण के रूप में भव्य फूल बंगला सजाया गया। रंग-बिरंगे फूलों से सजे इस अद्भुत श्रृंगार में ठाकुर बद्रीनाथ महाराज के दिव्य दर्शन ने सभी का मन मोह लिया। फूलों की मनमोहक सजावट और रोशनी ने वातावरण को और अधिक अलौकिक बना दिया।
इस अवसर पर मंदिर के सेवायत महंत पंडित धनेश दत्त चतुर्वेदी ने अक्षय तृतीया के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने कहा कि भगवान बद्रीनाथ की पूजा-अर्चना से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर “जय बद्रीनाथ” के जयघोष से गूंजता रहा और श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और भक्ति भाव के साथ इस पावन पर्व का आनंद लिया।
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