संरक्षित वन भूमि पर चला वन विभाग का बुलडोजर, अवैध बैनर-पोस्टर हटाए; कार्रवाई जारी रहने...
- 10h ago
गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व पूरे ब्रजमंडल में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इसी क्रम में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भागवत भवन में महर्षि वेदव्यास पूजन से हुई, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
पूजन कार्यक्रम में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, हिंदूवादी नेता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी सहित मंदिर के पदाधिकारी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने महर्षि वेदव्यास का पूजन कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की भारी भीड़ रही और पूरा वातावरण भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।
इस अवसर पर आयोजित भंडारे में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया। श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा के महत्व को बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है और गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन को सही दिशा मिलती है।
कार्यक्रम के दौरान गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने महर्षि वेदव्यास के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना और पुराणों के संकलन के माध्यम से भारतीय संस्कृति और सनातन ज्ञान को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और ज्ञान परंपरा के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व पूरे ब्रजमंडल में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इसी क्रम में मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में भी विशेष धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भागवत भवन में महर्षि वेदव्यास पूजन से हुई, जहां वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। पूजन कार्यक्रम में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा, हिंदूवादी नेता गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी सहित मंदिर के पदाधिकारी एवं श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने महर्षि वेदव्यास का पूजन कर गुरु परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तों की भारी भीड़ रही और पूरा वातावरण भक्ति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया। इस अवसर पर आयोजित भंडारे में दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया। श्रद्धालुओं ने गुरु पूर्णिमा के महत्व को बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को भगवान से भी श्रेष्ठ स्थान दिया गया है और गुरु के मार्गदर्शन से ही जीवन को सही दिशा मिलती है। कार्यक्रम के दौरान गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने महर्षि वेदव्यास के जीवन और उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वेदव्यास ने वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना और पुराणों के संकलन के माध्यम से भारतीय संस्कृति और सनातन ज्ञान को समृद्ध किया। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति सम्मान, कृतज्ञता और ज्ञान परंपरा के प्रति समर्पण का प्रतीक है।
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