संरक्षित वन भूमि पर चला वन विभाग का बुलडोजर, अवैध बैनर-पोस्टर हटाए; कार्रवाई जारी रहने...
- 10h ago
उत्तराखंड के देहरादून में भारी बारिश के बीच नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने 16 करोड़ रुपये के नए पुल की एप्रोच रोड धंस गई। हैरानी की बात यह है कि इस पुल को जनता के लिए खोले जाने के महज 17 दिन बाद ही यह घटना सामने आई, जिसके बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
घटना के बाद पुल से जुड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा धंस गया, जिससे देहरादून–पांवटा साहिब हाईवे पर यातायात प्रभावित हो गया। हालांकि जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) का कहना है कि पुल का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है और केवल एप्रोच रोड के नीचे से भारी बारिश के कारण मिट्टी बह जाने से यह नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करा दिया और यातायात बहाल करने के निर्देश दिए।
इस घटना के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने मौके पर प्रदर्शन करते हुए निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पुल अभी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड में है, इसलिए मरम्मत का पूरा खर्च निर्माण करने वाली कंपनी ही उठाएगी। विभाग का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे सड़क धंस गई, जबकि पुल की संरचना सुरक्षित है। घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उत्तराखंड के देहरादून में भारी बारिश के बीच नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर बने 16 करोड़ रुपये के नए पुल की एप्रोच रोड धंस गई। हैरानी की बात यह है कि इस पुल को जनता के लिए खोले जाने के महज 17 दिन बाद ही यह घटना सामने आई, जिसके बाद निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। घटना के बाद पुल से जुड़ने वाली सड़क का एक हिस्सा धंस गया, जिससे देहरादून–पांवटा साहिब हाईवे पर यातायात प्रभावित हो गया। हालांकि जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) का कहना है कि पुल का मुख्य ढांचा पूरी तरह सुरक्षित है और केवल एप्रोच रोड के नीचे से भारी बारिश के कारण मिट्टी बह जाने से यह नुकसान हुआ है। अधिकारियों ने तत्काल मरम्मत कार्य शुरू करा दिया और यातायात बहाल करने के निर्देश दिए। इस घटना के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने मौके पर प्रदर्शन करते हुए निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच की मांग की। वहीं जिला प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के अनुसार, पुल अभी डिफेक्ट लाइबिलिटी पीरियड में है, इसलिए मरम्मत का पूरा खर्च निर्माण करने वाली कंपनी ही उठाएगी। विभाग का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी बह गई, जिससे सड़क धंस गई, जबकि पुल की संरचना सुरक्षित है। घटना ने एक बार फिर मानसून के दौरान सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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