संरक्षित वन भूमि पर चला वन विभाग का बुलडोजर, अवैध बैनर-पोस्टर हटाए; कार्रवाई जारी रहने...
- 10h ago
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मथुरा के कृष्ण नगर स्थित बैंक कॉलोनी के दुर्गा देवी मंदिर में गुरु दक्षिणा महोत्सव का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और शिष्यों ने भाग लेकर अपने गुरु का पूजन किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला गया।
कार्यक्रम के दौरान मंदिर के महंत पंडित रामकृष्ण शास्त्री का शिष्यों ने विधि-विधान से तिलक, पूजन और पुष्प अर्पित कर सम्मान किया। इसके बाद शिष्यों ने परंपरा के अनुसार गुरु दक्षिणा अर्पित की और अपने गुरु से सुख, समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने भी गुरु पूर्णिमा के महत्व को समझते हुए इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई।
इस अवसर पर महंत पंडित रामकृष्ण शास्त्री ने कहा कि गुरु-शिष्य का रिश्ता पिता और पुत्र के समान होता है। जिस प्रकार एक पिता अपने पुत्र को जीवन की सही दिशा देता है, उसी प्रकार गुरु अपने शिष्य को ज्ञान, संस्कार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन में सही शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि गुरु का सम्मान और उनके प्रति श्रद्धा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और समर्पण व्यक्त करने का अवसर है, जो समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को मजबूत करने का संदेश देता है।
गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर मथुरा के कृष्ण नगर स्थित बैंक कॉलोनी के दुर्गा देवी मंदिर में गुरु दक्षिणा महोत्सव का आयोजन श्रद्धा और भक्ति के साथ किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और शिष्यों ने भाग लेकर अपने गुरु का पूजन किया तथा उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा और गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता पर विशेष प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम के दौरान मंदिर के महंत पंडित रामकृष्ण शास्त्री का शिष्यों ने विधि-विधान से तिलक, पूजन और पुष्प अर्पित कर सम्मान किया। इसके बाद शिष्यों ने परंपरा के अनुसार गुरु दक्षिणा अर्पित की और अपने गुरु से सुख, समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने भी गुरु पूर्णिमा के महत्व को समझते हुए इस आयोजन में बढ़-चढ़कर भागीदारी निभाई। इस अवसर पर महंत पंडित रामकृष्ण शास्त्री ने कहा कि गुरु-शिष्य का रिश्ता पिता और पुत्र के समान होता है। जिस प्रकार एक पिता अपने पुत्र को जीवन की सही दिशा देता है, उसी प्रकार गुरु अपने शिष्य को ज्ञान, संस्कार और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि गुरु के बिना जीवन में सही शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और आध्यात्मिक उन्नति संभव नहीं है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से अपने गुरु के बताए मार्ग पर चलने का आह्वान करते हुए कहा कि गुरु का सम्मान और उनके प्रति श्रद्धा भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति कृतज्ञता, सम्मान और समर्पण व्यक्त करने का अवसर है, जो समाज में नैतिक मूल्यों और संस्कारों को मजबूत करने का संदेश देता है।
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