संरक्षित वन भूमि पर चला वन विभाग का बुलडोजर, अवैध बैनर-पोस्टर हटाए; कार्रवाई जारी रहने...
- 10h ago
आगरा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यालय से जुड़ा एक कथित फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। पार्टी पदाधिकारियों का आरोप है कि वीडियो को एडिट कर भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया।
BJP नेताओं ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से शिकायत दर्ज कराई है और वीडियो बनाने व उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि वायरल सामग्री से आम लोगों को गुमराह करने और राजनीतिक माहौल प्रभावित करने की कोशिश की गई है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो की तकनीकी जांच, उसके मूल स्रोत, एडिटिंग और सोशल मीडिया पर प्रसार की पूरी पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में वीडियो फर्जी या भ्रामक पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आईटी एक्ट एवं अन्य लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
इस घटना के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या सूचना को बिना सत्यापन के साझा न करें, क्योंकि भ्रामक सामग्री कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
आगरा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यालय से जुड़ा एक कथित फर्जी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। पार्टी पदाधिकारियों का आरोप है कि वीडियो को एडिट कर भ्रामक तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। BJP नेताओं ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से शिकायत दर्ज कराई है और वीडियो बनाने व उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने वाले लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि वायरल सामग्री से आम लोगों को गुमराह करने और राजनीतिक माहौल प्रभावित करने की कोशिश की गई है। पुलिस ने शिकायत प्राप्त होने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वायरल वीडियो की तकनीकी जांच, उसके मूल स्रोत, एडिटिंग और सोशल मीडिया पर प्रसार की पूरी पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान CCTV फुटेज, डिजिटल साक्ष्य और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी समीक्षा की जाएगी। यदि जांच में वीडियो फर्जी या भ्रामक पाया जाता है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध आईटी एक्ट एवं अन्य लागू धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस घटना के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो गया है। वहीं प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी वीडियो या सूचना को बिना सत्यापन के साझा न करें, क्योंकि भ्रामक सामग्री कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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