संरक्षित वन भूमि पर चला वन विभाग का बुलडोजर, अवैध बैनर-पोस्टर हटाए; कार्रवाई जारी रहने...
- 10h ago
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों का नजदीकी स्कूलों में विलय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विलय के बाद खाली होने वाले विद्यालयों में प्री-प्राइमरी पाठशालाओं का संचालन किया जाएगा। मंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार पहली बार सरकारी स्तर पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं की शुरुआत करने जा रही है, जिससे छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
संदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले नकल रोकने के लिए अध्यादेश लाया गया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने उसे समाप्त कर दिया। साथ ही उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की घटनाओं का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बजट और संसाधनों में ऐतिहासिक वृद्धि की है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश का शिक्षा बजट पूर्ववर्ती सरकार के समय लगभग 28 हजार करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है। इस अतिरिक्त निवेश का उद्देश्य विद्यालयों की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है।
मंत्री ने बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सरकारी विद्यालयों में नामांकन 1.34 करोड़ से बढ़कर 1.90 करोड़ हो गया है, जबकि ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं से जुड़े 19 मानकों पर 36 प्रतिशत से बढ़ाकर 97 प्रतिशत तक सुधार किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को बेहतर, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में कम छात्र संख्या वाले परिषदीय विद्यालयों का नजदीकी स्कूलों में विलय किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विलय के बाद खाली होने वाले विद्यालयों में प्री-प्राइमरी पाठशालाओं का संचालन किया जाएगा। मंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार पहली बार सरकारी स्तर पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं की शुरुआत करने जा रही है, जिससे छोटे बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा की बेहतर सुविधा मिल सकेगी। संदीप सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उन्होंने बताया कि पहले नकल रोकने के लिए अध्यादेश लाया गया था, लेकिन पूर्ववर्ती सरकार ने उसे समाप्त कर दिया। साथ ही उन्होंने पिछली सरकार के कार्यकाल में हुई विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और धांधली की घटनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में बजट और संसाधनों में ऐतिहासिक वृद्धि की है। उनके अनुसार, उत्तर प्रदेश का शिक्षा बजट पूर्ववर्ती सरकार के समय लगभग 28 हजार करोड़ रुपये था, जिसे बढ़ाकर अब 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक कर दिया गया है। इस अतिरिक्त निवेश का उद्देश्य विद्यालयों की गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। मंत्री ने बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। सरकारी विद्यालयों में नामांकन 1.34 करोड़ से बढ़कर 1.90 करोड़ हो गया है, जबकि ड्रॉपआउट दर 19 प्रतिशत से घटकर 3 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा ऑपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं से जुड़े 19 मानकों पर 36 प्रतिशत से बढ़ाकर 97 प्रतिशत तक सुधार किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को बेहतर, आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
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