राया में दिनदहाड़े ताबड़तोड़ फायरिंग, दो गुटों के बीच चली गोलियां; गांव में मचा हड़कंप...
- 10h ago
मथुरा के संस्कृति विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग को लेकर पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर के 150 से अधिक शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लेकर एआई, शोध और साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी हासिल की।
संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा 8 से 13 जुलाई तक 'अनुसंधान एवं नवाचार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग' विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य संकाय सदस्यों और शोधार्थियों की शोध क्षमता को मजबूत करना तथा शैक्षणिक अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक, जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना था। देशभर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से 150 से अधिक संकाय सदस्य और शोधार्थी इसमें शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने शोध पद्धति, प्रकाशन नैतिकता, प्लेजरिज्म से बचाव, साइबर सुरक्षा, एआई आधारित शोध उपकरणों और नैतिक एआई सिद्धांतों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए।
उद्घाटन सत्र में डॉ. नन्हे सिंह ने शोध निष्ठा, बौद्धिक संपदा अधिकार और अकादमिक ईमानदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं मोहित नोजिया ने साइबर सुरक्षा और शोध के नए अवसरों पर जानकारी दी। डॉ. विकास सिंह भदौरिया ने प्रभावी शोध पद्धति और अंतःविषयक अनुसंधान की संभावनाओं पर चर्चा की, जबकि अखिलेश शर्मा ने शोध कार्यों में एआई टूल्स के जिम्मेदार उपयोग और उससे जुड़े नैतिक पहलुओं को विस्तार से समझाया।
समापन सत्र में डॉ. मुनिश सरन ने नैतिक एआई, निष्पक्षता, पारदर्शिता, गोपनीयता और उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान देते हुए जिम्मेदार एआई आधारित शोध की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम का सफल समन्वयन संजू बाला, रोहित वर्मा और शिवम सिंह ने डॉ. पंकज गोस्वामी के मार्गदर्शन में किया। समापन अवसर पर बताया गया कि निर्धारित उपस्थिति और फीडबैक प्रक्रिया पूरी करने वाले प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र के साथ सिस्को साइबर सिक्योरिटी प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
संस्कृति विश्वविद्यालय का यह आयोजन शोध और नवाचार के क्षेत्र में एआई के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे शिक्षकों और शोधार्थियों को आधुनिक तकनीकों के नैतिक उपयोग की बेहतर समझ मिल सके।
मथुरा के संस्कृति विश्वविद्यालय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक और जिम्मेदार उपयोग को लेकर पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर के 150 से अधिक शिक्षकों और शोधार्थियों ने भाग लेकर एआई, शोध और साइबर सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों से जानकारी हासिल की। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा 8 से 13 जुलाई तक 'अनुसंधान एवं नवाचार के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक उपयोग' विषय पर पांच दिवसीय ऑनलाइन फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य संकाय सदस्यों और शोधार्थियों की शोध क्षमता को मजबूत करना तथा शैक्षणिक अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के नैतिक, जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देना था। देशभर के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से 150 से अधिक संकाय सदस्य और शोधार्थी इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने शोध पद्धति, प्रकाशन नैतिकता, प्लेजरिज्म से बचाव, साइबर सुरक्षा, एआई आधारित शोध उपकरणों और नैतिक एआई सिद्धांतों पर विस्तार से अपने विचार साझा किए। उद्घाटन सत्र में डॉ. नन्हे सिंह ने शोध निष्ठा, बौद्धिक संपदा अधिकार और अकादमिक ईमानदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं मोहित नोजिया ने साइबर सुरक्षा और शोध के नए अवसरों पर जानकारी दी। डॉ. विकास सिंह भदौरिया ने प्रभावी शोध पद्धति और अंतःविषयक अनुसंधान की संभावनाओं पर चर्चा की, जबकि अखिलेश शर्मा ने शोध कार्यों में एआई टूल्स के जिम्मेदार उपयोग और उससे जुड़े नैतिक पहलुओं को विस्तार से समझाया। समापन सत्र में डॉ. मुनिश सरन ने नैतिक एआई, निष्पक्षता, पारदर्शिता, गोपनीयता और उत्तरदायित्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान देते हुए जिम्मेदार एआई आधारित शोध की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का सफल समन्वयन संजू बाला, रोहित वर्मा और शिवम सिंह ने डॉ. पंकज गोस्वामी के मार्गदर्शन में किया। समापन अवसर पर बताया गया कि निर्धारित उपस्थिति और फीडबैक प्रक्रिया पूरी करने वाले प्रतिभागियों को ई-प्रमाणपत्र के साथ सिस्को साइबर सिक्योरिटी प्रमाणपत्र भी प्रदान किए जाएंगे। संस्कृति विश्वविद्यालय का यह आयोजन शोध और नवाचार के क्षेत्र में एआई के जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है, जिससे शिक्षकों और शोधार्थियों को आधुनिक तकनीकों के नैतिक उपयोग की बेहतर समझ मिल सके।
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