सेंट फ्रांसिस स्कूल के छात्रों ने चलाया स्वच्छता अभियान, नुक्कड़ नाटक से दिया स्वच्छता का...
- 9h ago
हाथरस। सेठ फूलचंद बागला पीजी कॉलेज, हाथरस में प्राचार्य के नाम और कॉलेज से जुड़े फर्जी ई-मेल के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। फर्जी ई-मेल के जरिए संदेश भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल मच गई और मामले की जांच साइबर स्तर पर शुरू की गई है।
मामले में यह जांच की जा रही है कि फर्जी ई-मेल किसने बनाया, उसका इस्तेमाल किन लोगों को संदेश भेजने के लिए किया गया और इसके पीछे उद्देश्य क्या था। कॉलेज प्रशासन की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है।
सेठ फूलचंद बागला पीजी कॉलेज हाथरस का प्रमुख शिक्षण संस्थान है और वर्तमान में यह राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से संबद्ध है।
साइबर अपराध से जुड़े मामलों में फर्जी ई-मेल आईडी के जरिए किसी व्यक्ति या संस्था की पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर व्यवस्था ऐसे मामलों की जांच करती है। साइबर अपराध की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।
फिलहाल मामले में फर्जी ई-मेल के स्रोत और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी ई-मेल किस उद्देश्य से बनाया गया था और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
हाथरस। सेठ फूलचंद बागला पीजी कॉलेज, हाथरस में प्राचार्य के नाम और कॉलेज से जुड़े फर्जी ई-मेल के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। फर्जी ई-मेल के जरिए संदेश भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन में हलचल मच गई और मामले की जांच साइबर स्तर पर शुरू की गई है। मामले में यह जांच की जा रही है कि फर्जी ई-मेल किसने बनाया, उसका इस्तेमाल किन लोगों को संदेश भेजने के लिए किया गया और इसके पीछे उद्देश्य क्या था। कॉलेज प्रशासन की ओर से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित तथ्यों की जानकारी जुटाई जा रही है। सेठ फूलचंद बागला पीजी कॉलेज हाथरस का प्रमुख शिक्षण संस्थान है और वर्तमान में यह राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, अलीगढ़ से संबद्ध है। साइबर अपराध से जुड़े मामलों में फर्जी ई-मेल आईडी के जरिए किसी व्यक्ति या संस्था की पहचान का इस्तेमाल किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस की साइबर व्यवस्था ऐसे मामलों की जांच करती है। साइबर अपराध की शिकायत के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन भी उपलब्ध है। फिलहाल मामले में फर्जी ई-मेल के स्रोत और इसके पीछे शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी ई-मेल किस उद्देश्य से बनाया गया था और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी।
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