राया में पथराव और फायरिंग की सनसनी: 7 आरोपी गिरफ्तार, शिब्बो पहलवान से तमंचा बरामद...
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मथुरा रोडवेज में आठ संविदा परिचालकों की सेवा समाप्त किए जाने के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। परिवहन निगम ने लंबे समय से बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और कार्य में लापरवाही का हवाला देते हुए आठ संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ इस कार्रवाई के विरोध में उतर आया है। संघ का दावा है कि संबंधित कर्मचारियों के मेडिकल दस्तावेज पहले ही निगम में जमा कराए जा चुके थे और वे गंभीर बीमारी के कारण ड्यूटी पर नहीं आ सके थे।
परिवहन निगम द्वारा जिन आठ संविदा परिचालकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनमें गिरीश कुमार, किशन वीर सिंह, प्रताप सिंह, मुकेश कुमार, नारायणी सिंह, पवन कुमार, प्रेमचंद और प्रीतम सिंह शामिल हैं।
निगम का कहना है कि ये कर्मचारी लंबे समय से बिना सूचना अनुपस्थित चल रहे थे, इसलिए नियमानुसार उनकी संविदा समाप्त की गई। वहीं कर्मचारी संघ ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए कहा कि सभी कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र पहले ही विभाग में जमा किए जा चुके थे और उनकी अनुपस्थिति बीमारी के कारण थी।
संघ पदाधिकारियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कर्मचारियों को न्याय दिया जाए और मेडिकल आधार पर हुई अनुपस्थिति को ध्यान में रखते हुए सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।
उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के पदाधिकारी फिलहाल इस मामले में कर्मचारी संघ के विरोध के बाद विवाद गहराता नजर आ रहा है। अब सभी की निगाहें परिवहन निगम के अगले फैसले पर टिकी हैं कि सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार किया जाएगा या नहीं।
मथुरा रोडवेज में आठ संविदा परिचालकों की सेवा समाप्त किए जाने के मामले में अब नया मोड़ आ गया है। परिवहन निगम ने लंबे समय से बिना सूचना ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और कार्य में लापरवाही का हवाला देते हुए आठ संविदा कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर दी थीं। लेकिन अब उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ इस कार्रवाई के विरोध में उतर आया है। संघ का दावा है कि संबंधित कर्मचारियों के मेडिकल दस्तावेज पहले ही निगम में जमा कराए जा चुके थे और वे गंभीर बीमारी के कारण ड्यूटी पर नहीं आ सके थे। परिवहन निगम द्वारा जिन आठ संविदा परिचालकों की सेवाएं समाप्त की गई हैं, उनमें गिरीश कुमार, किशन वीर सिंह, प्रताप सिंह, मुकेश कुमार, नारायणी सिंह, पवन कुमार, प्रेमचंद और प्रीतम सिंह शामिल हैं। निगम का कहना है कि ये कर्मचारी लंबे समय से बिना सूचना अनुपस्थित चल रहे थे, इसलिए नियमानुसार उनकी संविदा समाप्त की गई। वहीं कर्मचारी संघ ने इस फैसले को अनुचित बताते हुए कहा कि सभी कर्मचारियों के मेडिकल प्रमाणपत्र पहले ही विभाग में जमा किए जा चुके थे और उनकी अनुपस्थिति बीमारी के कारण थी। संघ पदाधिकारियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर कर्मचारियों को न्याय दिया जाए और मेडिकल आधार पर हुई अनुपस्थिति को ध्यान में रखते हुए सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार किया जाए। उत्तर प्रदेश रोडवेज कर्मचारी संघ के पदाधिकारी फिलहाल इस मामले में कर्मचारी संघ के विरोध के बाद विवाद गहराता नजर आ रहा है। अब सभी की निगाहें परिवहन निगम के अगले फैसले पर टिकी हैं कि सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार किया जाएगा या नहीं।
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