संस्कृति विवि में पुस्तकालय विज्ञान के जनक प्रो. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती मनाई...
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लखनऊ। राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र के मदाखेड़ा गांव में एक बुजुर्ग दंपत्ति आज भी सरकारी आवास योजना के लाभ से वंचित है। बेचा और उनकी पत्नी शिवप्यारी वर्षों से कच्ची झोपड़ी में रहकर जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें पक्का आवास नहीं मिल सका है।
बुजुर्ग दंपत्ति का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से आवास दिलाने की मांग की, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में झोपड़ी में पानी भर जाता है, जिससे रहने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
सुरक्षित आवास के अभाव में दोनों बुजुर्ग हर मौसम की मार झेलने को मजबूर हैं। तेज बारिश, ठंड और गर्मी के दौरान उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे स्वयं पक्का मकान बनवाने में भी असमर्थ हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो वास्तव में इसके पात्र हैं। उनका मानना है कि ऐसे जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
वहीं बेचा और शिवप्यारी ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें केवल एक सुरक्षित और पक्के घर की आवश्यकता है, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बुजुर्ग दंपत्ति की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए उन्हें आवास योजना का लाभ दिला पाएगा, या फिर उनका पक्के घर का सपना यूं ही अधूरा रह जाएगा।
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के निगोहां क्षेत्र के मदाखेड़ा गांव में एक बुजुर्ग दंपत्ति आज भी सरकारी आवास योजना के लाभ से वंचित है। बेचा और उनकी पत्नी शिवप्यारी वर्षों से कच्ची झोपड़ी में रहकर जीवन यापन कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें पक्का आवास नहीं मिल सका है। बुजुर्ग दंपत्ति का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से आवास दिलाने की मांग की, लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में झोपड़ी में पानी भर जाता है, जिससे रहने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सुरक्षित आवास के अभाव में दोनों बुजुर्ग हर मौसम की मार झेलने को मजबूर हैं। तेज बारिश, ठंड और गर्मी के दौरान उनकी परेशानियां और बढ़ जाती हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण वे स्वयं पक्का मकान बनवाने में भी असमर्थ हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जो वास्तव में इसके पात्र हैं। उनका मानना है कि ऐसे जरूरतमंद परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाना चाहिए। वहीं बेचा और शिवप्यारी ने प्रशासन से जल्द हस्तक्षेप कर आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें केवल एक सुरक्षित और पक्के घर की आवश्यकता है, ताकि वे सम्मानपूर्वक अपना जीवन व्यतीत कर सकें। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस बुजुर्ग दंपत्ति की पीड़ा को गंभीरता से लेते हुए उन्हें आवास योजना का लाभ दिला पाएगा, या फिर उनका पक्के घर का सपना यूं ही अधूरा रह जाएगा।
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