संस्कृति विवि में पुस्तकालय विज्ञान के जनक प्रो. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती मनाई...
- 3h ago
महराजगंज उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के रुदलापुर गांव में नाग पंचमी के मौके पर एक अनोखी घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां 70 वर्षीय बुद्धिराम को लेकर ग्रामीणों का दावा है कि नाग पंचमी के दिन हर तीन साल में उनके व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाता है और वह जानवरों के लिए रखा भूसा, घास और चारा खाने लगते हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक यह सिलसिला वर्ष 1975 से चला आ रहा है। उनका दावा है कि नाग पंचमी के दिन गांव के समय माता मंदिर में पूजा-पाठ के दौरान बुद्धिराम पर कथित तौर पर 'महिषासुर' की सवारी आती है। इसके बाद वह सामान्य व्यवहार से अलग होकर नाद में रखा पानी पीने के साथ भूसा और घास खाने लगते हैं।
बताया जाता है कि इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। कुछ लोग उन्हें केला, घास, भूसा और लड्डू खिलाते हैं। ग्रामीणों में यह भी मान्यता है कि यहां मांगी गई मनौतियां पूरी होती हैं, जिसके चलते हर तीन साल में इस घटना को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है।
हालांकि, बुद्धिराम के इस व्यवहार को लेकर अभी तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा है, अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई चिकित्सकीय अथवा मनोवैज्ञानिक कारण है। पूरे घटनाक्रम की वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
महराजगंज उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के रुदलापुर गांव में नाग पंचमी के मौके पर एक अनोखी घटना लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां 70 वर्षीय बुद्धिराम को लेकर ग्रामीणों का दावा है कि नाग पंचमी के दिन हर तीन साल में उनके व्यवहार में अचानक बदलाव आ जाता है और वह जानवरों के लिए रखा भूसा, घास और चारा खाने लगते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक यह सिलसिला वर्ष 1975 से चला आ रहा है। उनका दावा है कि नाग पंचमी के दिन गांव के समय माता मंदिर में पूजा-पाठ के दौरान बुद्धिराम पर कथित तौर पर 'महिषासुर' की सवारी आती है। इसके बाद वह सामान्य व्यवहार से अलग होकर नाद में रखा पानी पीने के साथ भूसा और घास खाने लगते हैं। बताया जाता है कि इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। कुछ लोग उन्हें केला, घास, भूसा और लड्डू खिलाते हैं। ग्रामीणों में यह भी मान्यता है कि यहां मांगी गई मनौतियां पूरी होती हैं, जिसके चलते हर तीन साल में इस घटना को देखने के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। हालांकि, बुद्धिराम के इस व्यवहार को लेकर अभी तक कोई वैज्ञानिक पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि यह मामला धार्मिक आस्था से जुड़ा है, अंधविश्वास है या इसके पीछे कोई चिकित्सकीय अथवा मनोवैज्ञानिक कारण है। पूरे घटनाक्रम की वैज्ञानिक और चिकित्सकीय जांच के बाद ही वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।
ब्रेकिंग न्यूज़, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट और ताज़ा वीडियो सबसे पहले पाएं
ब्रेकिंग न्यूज़, वायरल वीडियो और हर बड़ी अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर
Link copied successfully!