संस्कृति विवि में पुस्तकालय विज्ञान के जनक प्रो. एस. आर. रंगनाथन की 134वीं जयंती मनाई...
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मथुरा। सावन के तीसरे सोमवार पर कान्हा की नगरी मथुरा पूरी तरह शिव भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। राधे-राधे की गूंज से महकने वाली ब्रजभूमि में हर ओर बम-बम भोले के जयकारे सुनाई दिए। कृष्ण जन्मभूमि के समीप स्थित प्राचीन गलतेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही।
गलतेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में बेहद अद्भुत और अनोखा माना जाता है। आमतौर पर शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती विराजमान होती हैं, लेकिन इस मंदिर में शिवलिंग के साथ माता गायत्री शक्ति स्वरूप में विराजमान हैं। माता गायत्री शिवलिंग के सीधे हाथ की ओर स्थित हैं, जो इस मंदिर की प्रमुख विशेषताओं में से एक है।
सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर मंदिर में भगवान भोलेनाथ का भव्य फूल बंगला सजाया गया। मंदिर के सेवायत महेश शर्मा ने बताया कि यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है और अपनी विशेष धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां भगवान शिव के साथ शक्ति के रूप में माता गायत्री विराजमान हैं।
मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां महादेव के सामने नंदी महाराज विराजमान नहीं हैं। बिना नंदी के भगवान शिव और उनके साथ माता गायत्री की मौजूदगी इस मंदिर को अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है।
सेवायत महेश शर्मा के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं में इस पावन धाम का संबंध द्वापर युग से भी बताया जाता है। मान्यता है कि माता रुक्मिणी ने यहां आकर भगवान शिव और माता गायत्री की विशेष पूजा-अर्चना की थी।
श्रद्धालुओं के बीच यह भी मान्यता है कि मंदिर में लगातार 41 दिनों तक दीपक जलाने से मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव और माता गायत्री के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं।
बिना नंदी के महादेव और संग में माता गायत्री का यह अनोखा स्वरूप मथुरा की धार्मिक विविधता और पौराणिक आस्था को दर्शाता है। ब्रजभूमि जहां भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, वहीं यहां भगवान शिव के भी कई अद्भुत और प्राचीन स्वरूप श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं।
मथुरा। सावन के तीसरे सोमवार पर कान्हा की नगरी मथुरा पूरी तरह शिव भक्ति के रंग में रंगी नजर आई। राधे-राधे की गूंज से महकने वाली ब्रजभूमि में हर ओर बम-बम भोले के जयकारे सुनाई दिए। कृष्ण जन्मभूमि के समीप स्थित प्राचीन गलतेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के लिए देर रात तक श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। गलतेश्वर महादेव मंदिर अपने आप में बेहद अद्भुत और अनोखा माना जाता है। आमतौर पर शिव मंदिरों में भगवान भोलेनाथ के साथ माता पार्वती विराजमान होती हैं, लेकिन इस मंदिर में शिवलिंग के साथ माता गायत्री शक्ति स्वरूप में विराजमान हैं। माता गायत्री शिवलिंग के सीधे हाथ की ओर स्थित हैं, जो इस मंदिर की प्रमुख विशेषताओं में से एक है। सावन के तीसरे सोमवार के अवसर पर मंदिर में भगवान भोलेनाथ का भव्य फूल बंगला सजाया गया। मंदिर के सेवायत महेश शर्मा ने बताया कि यह मंदिर हजारों वर्ष पुराना है और अपनी विशेष धार्मिक मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां भगवान शिव के साथ शक्ति के रूप में माता गायत्री विराजमान हैं। मंदिर की एक और खास बात यह है कि यहां महादेव के सामने नंदी महाराज विराजमान नहीं हैं। बिना नंदी के भगवान शिव और उनके साथ माता गायत्री की मौजूदगी इस मंदिर को अन्य शिव मंदिरों से अलग बनाती है। सेवायत महेश शर्मा के अनुसार, पौराणिक मान्यताओं में इस पावन धाम का संबंध द्वापर युग से भी बताया जाता है। मान्यता है कि माता रुक्मिणी ने यहां आकर भगवान शिव और माता गायत्री की विशेष पूजा-अर्चना की थी। श्रद्धालुओं के बीच यह भी मान्यता है कि मंदिर में लगातार 41 दिनों तक दीपक जलाने से मनोकामना पूरी होती है। इसी आस्था के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान शिव और माता गायत्री के दर्शन करते हैं और अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं। बिना नंदी के महादेव और संग में माता गायत्री का यह अनोखा स्वरूप मथुरा की धार्मिक विविधता और पौराणिक आस्था को दर्शाता है। ब्रजभूमि जहां भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है, वहीं यहां भगवान शिव के भी कई अद्भुत और प्राचीन स्वरूप श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं।
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