स्मैक के विवाद में दोस्त को जिंदा कुएं में फेंका, 3 साल बाद मिला नरकंकाल;...
- 9h ago
ग्रेटर नोएडा से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान दो लोगों की जान चली गई। टैंक में पहले सफाई के लिए उतरे कर्मचारी की तबीयत बिगड़ी तो उसे बचाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड भी अंदर उतर गया, लेकिन जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह हादसा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसायटी में शनिवार देर रात हुआ। जानकारी के मुताबिक, 40 वर्षीय शशिकांत शर्मा एसटीपी टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे। काफी देर तक उनके बाहर नहीं आने पर 22 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड आकाश उन्हें बचाने के लिए टैंक में चला गया। लेकिन कुछ ही देर में वह भी बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा।
घटना की सूचना मिलते ही नॉलेज पार्क थाना पुलिस और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर दोनों को टैंक से बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक आशंका है कि टैंक के अंदर मौजूद जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों की मौत हुई। हालांकि मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी।
हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहा है। क्या टैंक में किसी कर्मचारी को उतारने से पहले गैस की जांच की गई थी? क्या वहां गैस डिटेक्टर, सेफ्टी हार्नेस, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे? और जब एक कर्मचारी बेहोश हो गया था, तो दूसरे व्यक्ति को बिना सुरक्षा उपकरणों के अंदर क्यों उतरने दिया गया? इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस ने मामले में लापरवाही के आरोप में संबंधित ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।
यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सीवर और एसटीपी टैंक जैसे बंद स्थानों में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के काम कराना जानलेवा साबित हो सकता है। अब सभी की नजर जांच पर है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
ग्रेटर नोएडा से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट यानी एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान दो लोगों की जान चली गई। टैंक में पहले सफाई के लिए उतरे कर्मचारी की तबीयत बिगड़ी तो उसे बचाने के लिए सिक्योरिटी गार्ड भी अंदर उतर गया, लेकिन जहरीली गैस और ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने कार्यस्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह हादसा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसायटी में शनिवार देर रात हुआ। जानकारी के मुताबिक, 40 वर्षीय शशिकांत शर्मा एसटीपी टैंक की सफाई के लिए अंदर उतरे थे। काफी देर तक उनके बाहर नहीं आने पर 22 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड आकाश उन्हें बचाने के लिए टैंक में चला गया। लेकिन कुछ ही देर में वह भी बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा। घटना की सूचना मिलते ही नॉलेज पार्क थाना पुलिस और फायर सर्विस की टीम मौके पर पहुंची। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर दोनों को टैंक से बाहर निकाला गया और अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक आशंका है कि टैंक के अंदर मौजूद जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी के कारण दोनों की मौत हुई। हालांकि मौत के सही कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद होगी। हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल सुरक्षा मानकों को लेकर उठ रहा है। क्या टैंक में किसी कर्मचारी को उतारने से पहले गैस की जांच की गई थी? क्या वहां गैस डिटेक्टर, सेफ्टी हार्नेस, ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध थे? और जब एक कर्मचारी बेहोश हो गया था, तो दूसरे व्यक्ति को बिना सुरक्षा उपकरणों के अंदर क्यों उतरने दिया गया? इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पुलिस ने मामले में लापरवाही के आरोप में संबंधित ठेकेदार को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सीवर और एसटीपी टैंक जैसे बंद स्थानों में बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम के काम कराना जानलेवा साबित हो सकता है। अब सभी की नजर जांच पर है कि इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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