'सपनों की नई उड़ान' कार्यक्रम में सांसद हेमा मालिनी ने की डीएम चंद्र प्रकाश सिंह...
- 12h ago
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा रोडवेज डिपो में डीजल रिकॉर्ड में बड़ी अनियमितता का मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में करीब 14 हजार लीटर डीजल का हिसाब नहीं मिलने और लगभग 13.47 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने पर तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) ने मामले की जांच कराई। जांच में डीजल सेक्शन के अभिलेखों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद डीजल सेक्शन से जुड़े तीन लिपिकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। वहीं, पर्यवेक्षण में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी शासन को कार्रवाई की संस्तुति भेजी गई है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डीजल से संबंधित अभिलेखों का नियमित मिलान और सत्यापन नहीं किया गया, जिसके चलते रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया। अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला केवल रिकॉर्ड में गड़बड़ी का है या डीजल की वास्तविक हेराफेरी हुई है।
परिवहन विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निलंबित कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है और मामले की जांच जारी है।
बांदा। उत्तर प्रदेश के बांदा रोडवेज डिपो में डीजल रिकॉर्ड में बड़ी अनियमितता का मामला सामने आने के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच में करीब 14 हजार लीटर डीजल का हिसाब नहीं मिलने और लगभग 13.47 लाख रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने पर तीन कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जानकारी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) ने मामले की जांच कराई। जांच में डीजल सेक्शन के अभिलेखों में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। इसके बाद डीजल सेक्शन से जुड़े तीन लिपिकों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई। वहीं, पर्यवेक्षण में कथित लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी शासन को कार्रवाई की संस्तुति भेजी गई है। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि डीजल से संबंधित अभिलेखों का नियमित मिलान और सत्यापन नहीं किया गया, जिसके चलते रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया। अब पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच कराई जा रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मामला केवल रिकॉर्ड में गड़बड़ी का है या डीजल की वास्तविक हेराफेरी हुई है। परिवहन विभाग का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल निलंबित कर्मचारियों से जवाब तलब किया गया है और मामले की जांच जारी है।
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