दंगल मेले में युवक की गोली मारकर हत्या, दो साल पुरानी रंजिश बनी वजह...
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वृंदावन। संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास समिति द्वारा वन महाराज कॉलेज में आयोजित स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव के दूसरे दिन सुर, भक्ति और सूफी संगीत का अनुपम संगम देखने को मिला। शनिवार की संध्या मुंबई की सुप्रसिद्ध बॉलीवुड गायिका प्रिया वाणी पंडित के नाम रही, जिन्होंने अपनी मधुर सूफियाना गायकी से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
प्रिया वाणी पंडित ने कार्यक्रम का शुभारंभ 'घट-घट में पंछी बोलता' से किया। इसके बाद उन्होंने 'राम का गुण गाओ', 'अच्युतम केशवम' और 'ऐसी लागी लगन' जैसे लोकप्रिय भजनों को सूफियाना अंदाज़ में प्रस्तुत कर पूरे पंडाल को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
उन्होंने राग चारुकेशी, पुरिया धनाश्री और भैरवी के आलाप के साथ 'भोर भई, कन्हैया की बात' की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का समापन 'सांसों की माला पे सिमरूं मैं हरि का नाम' से हुआ, जिस पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकार का स्वागत किया।
उल्लेखनीय है कि महोत्सव के प्रथम दिवस का समापन प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका मनाली बोस की ध्रुपद-धमार गायकी के साथ हुआ था। उनकी प्रस्तुति में हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्रा तथा तबले पर पंडित रामकुमार मिश्रा ने संगति कर शास्त्रीय संगीत की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
वृंदावन। संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास समिति द्वारा वन महाराज कॉलेज में आयोजित स्वामी हरिदास संगीत एवं नृत्य महोत्सव के दूसरे दिन सुर, भक्ति और सूफी संगीत का अनुपम संगम देखने को मिला। शनिवार की संध्या मुंबई की सुप्रसिद्ध बॉलीवुड गायिका प्रिया वाणी पंडित के नाम रही, जिन्होंने अपनी मधुर सूफियाना गायकी से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। प्रिया वाणी पंडित ने कार्यक्रम का शुभारंभ 'घट-घट में पंछी बोलता' से किया। इसके बाद उन्होंने 'राम का गुण गाओ', 'अच्युतम केशवम' और 'ऐसी लागी लगन' जैसे लोकप्रिय भजनों को सूफियाना अंदाज़ में प्रस्तुत कर पूरे पंडाल को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। उन्होंने राग चारुकेशी, पुरिया धनाश्री और भैरवी के आलाप के साथ 'भोर भई, कन्हैया की बात' की मनमोहक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का समापन 'सांसों की माला पे सिमरूं मैं हरि का नाम' से हुआ, जिस पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकार का स्वागत किया। उल्लेखनीय है कि महोत्सव के प्रथम दिवस का समापन प्रसिद्ध शास्त्रीय गायिका मनाली बोस की ध्रुपद-धमार गायकी के साथ हुआ था। उनकी प्रस्तुति में हारमोनियम पर धर्मनाथ मिश्रा तथा तबले पर पंडित रामकुमार मिश्रा ने संगति कर शास्त्रीय संगीत की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
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