श्रीराम कथा के आठवें दिन राम-भरत मिलन, श्रद्धालु भावुक हुए

  • 10 days ago
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मथुरा के गुरूकृपा विलास कॉलोनी में चल रहे नवदिवसीय संगीतमयी श्रीराम कथा महोत्सव के आठवें दिन राम-भरत मिलन का अत्यंत मार्मिक प्रसंग सुनाया गया। कथा व्यास पूज्य शान्तनू जी महाराज ने भरत चरित्र की महिमा का वर्णन करते हुए बताया कि महाराज भरत का त्याग, प्रेम और प्रभु भक्ति संसार के लिए आदर्श है। कथा के दौरान जब चित्रकूट में भगवान श्रीराम और भरत के मिलन का प्रसंग आया तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं और पूरा पंडाल भावनाओं से भर उठा।

कथावाचक ने बताया कि जब भरत भगवान श्रीराम को वापस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट पहुंचे और प्रभु के चरणों में गिर पड़े, तब श्रीराम ने उन्हें प्रेमपूर्वक उठाकर गले लगाया और कहा कि उनमें कोई दोष नहीं है। इस प्रसंग का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

शान्तनू जी महाराज ने कहा कि भरत जैसा त्यागी और धर्मनिष्ठ भाई संसार में दुर्लभ है। उन्होंने रामचरितमानस के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए बताया कि स्वयं भगवान श्रीराम भी भरत का स्मरण करते हैं। तीर्थराज प्रयाग ने भरत को साधु कहा और भगवान ने लक्ष्मण से कहा था कि भरत जैसा पवित्र और निष्काम भाई मिलना अत्यंत कठिन है।

कथा में यह भी बताया गया कि जब भरत को महाराज दशरथ के निधन और श्रीराम के वनवास का समाचार मिला तो वे अत्यंत दुखी हो गए। उन्होंने माता कैकेयी के निर्णय का विरोध किया और भगवान श्रीराम को वापस अयोध्या लाने का संकल्प लिया। लेकिन जब प्रभु ने वनवास पूरा करने की बात कही तो भरत ने उनकी खड़ाऊं को अयोध्या के सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं सेवक की तरह राजकाज संभाला।

राम-भरत मिलन के इस भावपूर्ण प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भाईचारे, त्याग, समर्पण और धर्म पालन का संदेश दिया। कथा स्थल पर उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु पूरे समय भक्ति में लीन रहे और जय श्रीराम के जयघोष से वातावरण गूंज उठा।

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