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मथुरा। सावन मास के शुभारंभ के साथ ही धर्मनगरी मथुरा के विश्व प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश मंदिर में पारंपरिक हिंडोला उत्सव का शुभारंभ हो गया। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार राजाधिराज भगवान श्री द्वारकाधीश को प्राचीन सोने और चांदी के हिंडोले में विराजमान कर श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए।
सावन के पहले ही दिन ठाकुरजी के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान द्वारकाधीश के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। पूरे मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा।
मंदिर के मीडिया प्रभारी एडवोकेट राकेश तिवारी ने बताया कि मंदिर के सभी धार्मिक कार्यक्रमों का निर्धारण मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉ. वागीश कुमार जी महाराज (कांकरोली नरेश, तृतीय पीठ) के निर्देशन में परंपरानुसार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि सावन मास की शुरुआत में भगवान श्री द्वारकाधीश को सबसे पहले मंदिर के प्राचीन स्वर्ण एवं रजत हिंडोलों में विराजमान कराया जाता है। इसके बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार पूरे सावन माह तक प्रतिदिन ठाकुरजी विभिन्न हिंडोलों में भक्तों को दर्शन देते रहेंगे।
सावन के इस पावन अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित की गई। हिंडोला उत्सव का यह दिव्य आयोजन मथुरा की धार्मिक परंपरा और आस्था का प्रमुख आकर्षण माना जाता है।
मथुरा। सावन मास के शुभारंभ के साथ ही धर्मनगरी मथुरा के विश्व प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश मंदिर में पारंपरिक हिंडोला उत्सव का शुभारंभ हो गया। वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार राजाधिराज भगवान श्री द्वारकाधीश को प्राचीन सोने और चांदी के हिंडोले में विराजमान कर श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए। सावन के पहले ही दिन ठाकुरजी के दर्शन के लिए मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भक्तों ने भक्ति और श्रद्धा के साथ भगवान द्वारकाधीश के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। पूरे मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और जयकारों से भक्तिमय वातावरण बना रहा। मंदिर के मीडिया प्रभारी एडवोकेट राकेश तिवारी ने बताया कि मंदिर के सभी धार्मिक कार्यक्रमों का निर्धारण मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉ. वागीश कुमार जी महाराज (कांकरोली नरेश, तृतीय पीठ) के निर्देशन में परंपरानुसार किया जाता है। उन्होंने बताया कि सावन मास की शुरुआत में भगवान श्री द्वारकाधीश को सबसे पहले मंदिर के प्राचीन स्वर्ण एवं रजत हिंडोलों में विराजमान कराया जाता है। इसके बाद धार्मिक परंपरा के अनुसार पूरे सावन माह तक प्रतिदिन ठाकुरजी विभिन्न हिंडोलों में भक्तों को दर्शन देते रहेंगे। सावन के इस पावन अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए दर्शन व्यवस्था भी सुचारु रूप से संचालित की गई। हिंडोला उत्सव का यह दिव्य आयोजन मथुरा की धार्मिक परंपरा और आस्था का प्रमुख आकर्षण माना जाता है।
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