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- 9h ago
मथुरा। योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ योग एंड नेचुरोपैथी में अब बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस (BNYS) के साथ-साथ डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) की पढ़ाई भी शुरू कर दी गई है। नए शैक्षणिक सत्र से एमडी में प्रवेश प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है।
स्कूल ऑफ योग एंड नेचुरोपैथी की विभागाध्यक्ष डॉ. तनुश्री ने बताया कि बीएनवाईएस साढ़े पांच वर्ष का व्यावसायिक पाठ्यक्रम है, जिसमें साढ़े चार वर्ष की पढ़ाई और एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। इस दौरान विद्यार्थियों को एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, डायग्नोसिस, योग चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा, पोषण, हाइड्रोथेरेपी, मड थेरेपी, फास्टिंग थेरेपी और लाइफस्टाइल मेडिसिन का व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि अब विद्यार्थी योग, प्राकृतिक चिकित्सा, न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स तथा एक्यूपंक्चर जैसे विषयों में एमडी कर विशेषज्ञ चिकित्सक, शोधकर्ता, शिक्षक और स्वास्थ्य सलाहकार के रूप में अपना भविष्य बना सकेंगे। एमडी पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को उन्नत नैदानिक ज्ञान, अनुसंधान कौशल और रोग प्रबंधन की विशेषज्ञता प्रदान करेगा।
डॉ. तनुश्री ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, तनाव और अनिद्रा जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग और प्राकृतिक चिकित्सा की मांग लगातार बढ़ रही है। संस्कृति विश्वविद्यालय आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की मूलभूत जानकारी के साथ समग्र स्वास्थ्य देखभाल की वैज्ञानिक शिक्षा उपलब्ध करा रहा है।
विश्वविद्यालय में अनुभवी संकाय, आधुनिक प्रयोगशालाएं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, ओपीडी सुविधा, अनुसंधान और नवाचार के अवसर, उद्योग एवं अस्पतालों में इंटर्नशिप और रोजगारोन्मुख शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को तैयार किया जा रहा है। एमडी और बीएनवाईएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र सरकारी एवं निजी अस्पतालों, आयुष संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, शोध संस्थानों, कॉर्पोरेट वेलनेस सेक्टर, हेल्थ रिसॉर्ट, मेडिकल टूरिज्म और स्वयं का वेलनेस सेंटर स्थापित कर बेहतर करियर बना सकते हैं।
मथुरा। योग और प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में करियर बनाने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। संस्कृति विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ योग एंड नेचुरोपैथी में अब बैचलर ऑफ नेचुरोपैथी एंड योगिक साइंस (BNYS) के साथ-साथ डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (एमडी) की पढ़ाई भी शुरू कर दी गई है। नए शैक्षणिक सत्र से एमडी में प्रवेश प्रक्रिया भी प्रारंभ हो चुकी है। स्कूल ऑफ योग एंड नेचुरोपैथी की विभागाध्यक्ष डॉ. तनुश्री ने बताया कि बीएनवाईएस साढ़े पांच वर्ष का व्यावसायिक पाठ्यक्रम है, जिसमें साढ़े चार वर्ष की पढ़ाई और एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। इस दौरान विद्यार्थियों को एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, पैथोलॉजी, डायग्नोसिस, योग चिकित्सा, प्राकृतिक चिकित्सा, पोषण, हाइड्रोथेरेपी, मड थेरेपी, फास्टिंग थेरेपी और लाइफस्टाइल मेडिसिन का व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने बताया कि अब विद्यार्थी योग, प्राकृतिक चिकित्सा, न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स तथा एक्यूपंक्चर जैसे विषयों में एमडी कर विशेषज्ञ चिकित्सक, शोधकर्ता, शिक्षक और स्वास्थ्य सलाहकार के रूप में अपना भविष्य बना सकेंगे। एमडी पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को उन्नत नैदानिक ज्ञान, अनुसंधान कौशल और रोग प्रबंधन की विशेषज्ञता प्रदान करेगा। डॉ. तनुश्री ने कहा कि बदलती जीवनशैली के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, तनाव और अनिद्रा जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में योग और प्राकृतिक चिकित्सा की मांग लगातार बढ़ रही है। संस्कृति विश्वविद्यालय आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की मूलभूत जानकारी के साथ समग्र स्वास्थ्य देखभाल की वैज्ञानिक शिक्षा उपलब्ध करा रहा है। विश्वविद्यालय में अनुभवी संकाय, आधुनिक प्रयोगशालाएं, क्लिनिकल प्रशिक्षण, ओपीडी सुविधा, अनुसंधान और नवाचार के अवसर, उद्योग एवं अस्पतालों में इंटर्नशिप और रोजगारोन्मुख शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को तैयार किया जा रहा है। एमडी और बीएनवाईएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र सरकारी एवं निजी अस्पतालों, आयुष संस्थानों, मेडिकल कॉलेजों, शोध संस्थानों, कॉर्पोरेट वेलनेस सेक्टर, हेल्थ रिसॉर्ट, मेडिकल टूरिज्म और स्वयं का वेलनेस सेंटर स्थापित कर बेहतर करियर बना सकते हैं।
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