राम-केवट संवाद सुन भावुक हुए श्रद्धालु, बोले सुतीक्ष्ण दास महाराज- सच्ची भक्ति से ही मिलते हैं प्रभु

  • 12 days ago
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पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर मथुरा स्थित गुरूकृपा विलास में आयोजित श्रीरामकथा के सातवें दिन श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। कथा के शुभारंभ पर जगद्गुरु श्री नाभा द्वाराचार्य पूज्य श्री सुतीक्ष्ण दास जी महाराज एवं कथा यजमान प्रभात अग्रवाल ने श्रीरामकथा और कथा व्यास का पूजन किया।

इस अवसर पर पूज्य श्री सुतीक्ष्ण दास जी महाराज ने कहा कि भगवान की प्राप्ति के लिए सच्ची भक्ति, धैर्य और समर्पण आवश्यक है। उन्होंने शबरी और अहिल्या के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि जिन्होंने प्रभु की प्रतीक्षा सच्चे मन से की, भगवान स्वयं उनके द्वार पहुंचे।

कथावाचक शान्तनू महाराज ने श्रीराम के वनगमन का मार्मिक वर्णन किया और बताया कि कैकेयी के दो वरदानों के कारण भगवान श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास स्वीकार करना पड़ा। कथा के दौरान राम-केवट संवाद का जीवंत चित्रण किया गया, जिसने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।

प्रवाचक ने चौपाई "छुआते शिला भई नारी, नाव खीन्ह मोहि जानहु खवारी" का भावार्थ बताते हुए केवट की विनम्रता और प्रभु के प्रति उसकी अटूट श्रद्धा का वर्णन किया। साथ ही गंगा महिमा और भरत मिलाप की भूमिका पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।

कथा स्थल पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर भक्तिभाव से कथा श्रवण किया। आयोजन में नीता अग्रवाल, विपिन अग्रवाल, नवीन अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, मनोज मुकुट वाले, अंजना अग्रवाल, गजानंद अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, प्रियांशु अग्रवाल, विकास अग्रवाल, शैलेष अग्रवाल सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

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