परिक्रमा कर लौट रहे श्रद्धालुओं को ट्रेलर ने रौंदा, दो की मौत, 13 घायल...
- 17h ago
पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर गुरूकृपा विलास में आयोजित श्रीराम कथा के छठे दिन श्रद्धालु उस समय भावविभोर हो उठे, जब कथावाचक शान्तनू महाराज ने भगवान श्रीराम के वनगमन का मार्मिक प्रसंग सुनाया। कथा के दौरान पूरा पंडाल भक्ति और भावनाओं के सागर में डूबा नजर आया।
शान्तनू महाराज ने बताया कि अयोध्या की प्रजा भगवान राम को अत्यंत प्रेम करती थी और उन्हें राजा के रूप में देखना चाहती थी। राज्याभिषेक की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं, लेकिन मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांग लिए। परिणामस्वरूप भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास स्वीकार करना पड़ा और माता सीता तथा लक्ष्मण भी उनके साथ वन के लिए प्रस्थान कर गए।
कथावाचक ने कहा कि भगवान राम ने माता-पिता की आज्ञा और परिवार की मर्यादा को सर्वोपरि मानते हुए बिना किसी विरोध के वनवास स्वीकार किया। यही कारण है कि उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि जीवन में परिवार, संस्कार और रिश्तों का सम्मान करना ही भगवान राम के आदर्शों पर चलना है।
वनगमन का प्रसंग सुनकर कथा पंडाल में मौजूद श्रद्धालु भावुक हो गए। कथा के दौरान प्रभु श्रीराम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर कथा का रसपान किया और भगवान राम के आदर्श जीवन से प्रेरणा प्राप्त की।
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