परिक्रमा कर लौट रहे श्रद्धालुओं को ट्रेलर ने रौंदा, दो की मौत, 13 घायल...
- 17h ago
कान्हा की नगरी मथुरा में पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर श्री घाटी वाले बालाजी महाराज का जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। बालाजी पदयात्रा सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर जय श्रीराम और जय बालाजी महाराज के जयघोषों से गूंज उठा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।
जन्मोत्सव की शुरुआत शंखनाद, वेद मंत्रों और मंगल ध्वनियों के बीच भगवान श्री बालाजी महाराज के दिव्य पंचामृत अभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे दिन मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा।
शाम के समय मंदिर को देश-विदेश से आए सुगंधित और रंग-बिरंगे फूलों से सजाकर भव्य फूल बंगला तैयार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वहीं बालाजी महाराज को अर्पित किए गए विशाल छप्पन भोग की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी रही। विविध व्यंजनों से सजे भोग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं।
मंदिर के सेवायत महंत बल्देव शर्मा ने बताया कि पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर बालाजी महाराज का जन्मोत्सव अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने इस दिव्य आयोजन में शामिल होकर दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण किया, उनका जीवन धन्य हो गया। यह आयोजन श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति के भव्य स्वरूप का अद्भुत उदाहरण बना।
कान्हा की नगरी मथुरा में पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर श्री घाटी वाले बालाजी महाराज का जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया गया। बालाजी पदयात्रा सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस भव्य धार्मिक आयोजन में सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर जय श्रीराम और जय बालाजी महाराज के जयघोषों से गूंज उठा, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। जन्मोत्सव की शुरुआत शंखनाद, वेद मंत्रों और मंगल ध्वनियों के बीच भगवान श्री बालाजी महाराज के दिव्य पंचामृत अभिषेक से हुई। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त की। पूरे दिन मंदिर में दर्शन के लिए भक्तों का तांता लगा रहा। शाम के समय मंदिर को देश-विदेश से आए सुगंधित और रंग-बिरंगे फूलों से सजाकर भव्य फूल बंगला तैयार किया गया, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। वहीं बालाजी महाराज को अर्पित किए गए विशाल छप्पन भोग की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी रही। विविध व्यंजनों से सजे भोग के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। मंदिर के सेवायत महंत बल्देव शर्मा ने बताया कि पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा पर बालाजी महाराज का जन्मोत्सव अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिन्होंने इस दिव्य आयोजन में शामिल होकर दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण किया, उनका जीवन धन्य हो गया। यह आयोजन श्रद्धा, सेवा और सनातन संस्कृति के भव्य स्वरूप का अद्भुत उदाहरण बना।
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