मां की हत्या करने वाले दोषी को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया ₹26 हजार का जुर्माना...
- 10h ago
फतेहपुर में सरकारी सहायता प्राप्त सर्वोदय इंटर कॉलेज के करीब 1800 छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को विद्यालय की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। सुबह स्कूल खुलते ही छात्र-छात्राएं कक्षाओं का बहिष्कार कर कॉलेज परिसर और सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, तिरंगा और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर लेकर छात्रों ने विद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन इतना व्यापक था कि कुछ ही घंटों में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को मौके पर पहुंचना पड़ा।
छात्रों का आरोप था कि विद्यालय में लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। भीषण गर्मी के बावजूद कई कक्षाओं में पंखे नहीं हैं, जहां पंखे लगे हैं उनमें से कई खराब हैं और कुछ में करंट आने की शिकायत है। पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है, शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है और बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच भी नहीं हैं। छात्रों का कहना था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विद्यालय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवेश, मार्कशीट और अन्य प्रमाणपत्रों के नाम पर अतिरिक्त धनराशि वसूली जाती है। कई छात्रों ने दावा किया कि समस्याओं की शिकायत करने पर उन्हें परीक्षा में फेल करने या कार्रवाई की धमकी भी दी जाती थी। इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
सुबह से शुरू हुआ यह प्रदर्शन धीरे-धीरे बड़ा आंदोलन बन गया। पहले विद्यालय प्रशासन ने छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अंततः जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) राकेश कुमार स्वयं कॉलेज पहुंचे और छात्रों से बातचीत की।
करीब पांच घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग ने छात्रों को लिखित आश्वासन दिया। अधिकारियों ने घोषणा की कि प्रत्येक कक्षा में चार-चार नए पंखे लगाए जाएंगे, बिजली की वायरिंग दुरुस्त की जाएगी, एक आरओ वाटर कूलर लगाया जाएगा और बैठने के लिए नई डेस्क-बेंच उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही विद्यालय की अन्य बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार किया जाएगा। इसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया।
इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकजुट होकर केवल शिक्षा से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क पर उतरे। सोशल मीडिया पर भी यह आंदोलन तेजी से चर्चा का विषय बन गया, जहां कई लोगों ने इसे नई पीढ़ी की जागरूकता और अधिकारों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता का उदाहरण बताया। कुछ पोस्टों में इसे "Gen Alpha" के आंदोलन के रूप में भी उल्लेखित किया गया।
फिलहाल शिक्षा विभाग ने छात्रों की मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन अपने लिखित आश्वासन को तय समय सीमा के भीतर कितना पूरा करता है और विद्यालय की व्यवस्थाओं में वास्तव में कितना सुधार देखने को मिलता है।
फतेहपुर में सरकारी सहायता प्राप्त सर्वोदय इंटर कॉलेज के करीब 1800 छात्र-छात्राओं ने मंगलवार को विद्यालय की बदहाल व्यवस्थाओं के खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ दिया। सुबह स्कूल खुलते ही छात्र-छात्राएं कक्षाओं का बहिष्कार कर कॉलेज परिसर और सड़क पर उतर आए। हाथों में तख्तियां, तिरंगा और डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर लेकर छात्रों ने विद्यालय प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन इतना व्यापक था कि कुछ ही घंटों में जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग को मौके पर पहुंचना पड़ा। छात्रों का आरोप था कि विद्यालय में लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। भीषण गर्मी के बावजूद कई कक्षाओं में पंखे नहीं हैं, जहां पंखे लगे हैं उनमें से कई खराब हैं और कुछ में करंट आने की शिकायत है। पीने के लिए स्वच्छ पानी उपलब्ध नहीं है, शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है और बैठने के लिए पर्याप्त डेस्क-बेंच भी नहीं हैं। छात्रों का कहना था कि कई बार शिकायत करने के बावजूद विद्यालय प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रवेश, मार्कशीट और अन्य प्रमाणपत्रों के नाम पर अतिरिक्त धनराशि वसूली जाती है। कई छात्रों ने दावा किया कि समस्याओं की शिकायत करने पर उन्हें परीक्षा में फेल करने या कार्रवाई की धमकी भी दी जाती थी। इन आरोपों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। सुबह से शुरू हुआ यह प्रदर्शन धीरे-धीरे बड़ा आंदोलन बन गया। पहले विद्यालय प्रशासन ने छात्रों को समझाने की कोशिश की, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे। स्थिति को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अंततः जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) राकेश कुमार स्वयं कॉलेज पहुंचे और छात्रों से बातचीत की। करीब पांच घंटे तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद शिक्षा विभाग ने छात्रों को लिखित आश्वासन दिया। अधिकारियों ने घोषणा की कि प्रत्येक कक्षा में चार-चार नए पंखे लगाए जाएंगे, बिजली की वायरिंग दुरुस्त की जाएगी, एक आरओ वाटर कूलर लगाया जाएगा और बैठने के लिए नई डेस्क-बेंच उपलब्ध कराई जाएंगी। साथ ही विद्यालय की अन्य बुनियादी सुविधाओं में भी सुधार किया जाएगा। इसके बाद छात्रों ने अपना आंदोलन समाप्त कर दिया। इस प्रदर्शन की सबसे खास बात यह रही कि इतनी बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एकजुट होकर केवल शिक्षा से जुड़ी बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सड़क पर उतरे। सोशल मीडिया पर भी यह आंदोलन तेजी से चर्चा का विषय बन गया, जहां कई लोगों ने इसे नई पीढ़ी की जागरूकता और अधिकारों के प्रति बढ़ती संवेदनशीलता का उदाहरण बताया। कुछ पोस्टों में इसे "Gen Alpha" के आंदोलन के रूप में भी उल्लेखित किया गया। फिलहाल शिक्षा विभाग ने छात्रों की मांगों को पूरा करने का भरोसा दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि प्रशासन अपने लिखित आश्वासन को तय समय सीमा के भीतर कितना पूरा करता है और विद्यालय की व्यवस्थाओं में वास्तव में कितना सुधार देखने को मिलता है।
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