परिक्रमा कर लौट रहे श्रद्धालुओं को ट्रेलर ने रौंदा, दो की मौत, 13 घायल...
- 17h ago
वृंदावन। अधिकमास की पावन परमा एकादशी पर गुरुवार को धर्मनगरी वृंदावन भक्ति और श्रद्धा के रंग में पूरी तरह सराबोर नजर आई। भगवान बांके बिहारी और राधारानी के दर्शन के साथ पंचकोसीय परिक्रमा लगाने के लिए देशभर से आए हजारों श्रद्धालुओं ने वृंदावन की गलियों और परिक्रमा मार्ग को आस्था के महासागर में बदल दिया।
तड़के सुबह से ही परिक्रमा मार्ग पर श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। "राधे-राधे" और "हरे कृष्ण" के जयघोष से पूरा वृंदावन गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए भगवान के नाम का स्मरण करते नजर आए। परिक्रमा मार्ग पर भक्तों का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि देर रात तक श्रद्धालुओं का आवागमन लगातार जारी रहा।
अधिकमास की परमा एकादशी का सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन वृंदावन में पंचकोसीय परिक्रमा और ठाकुरजी के दर्शन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु वृंदावन पहुंचे।
कई भक्तों ने नंगे पैर तो कई श्रद्धालुओं ने दंडवत परिक्रमा कर अपनी श्रद्धा और भक्ति का परिचय दिया। भीषण गर्मी और भारी भीड़ के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी देखने को नहीं मिली। हर उम्र के लोग भक्ति भाव के साथ परिक्रमा करते नजर आए।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। परिक्रमा मार्ग पर सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे, वहीं पेयजल, चिकित्सा और यातायात व्यवस्था को भी सुचारू बनाए रखने के लिए अतिरिक्त व्यवस्थाएं की गईं। प्रशासनिक अधिकारियों ने लगातार निगरानी रखकर श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसका विशेष ध्यान रखा।
परमा एकादशी के अवसर पर वृंदावन में उमड़ी यह विशाल श्रद्धा की भीड़ एक बार फिर साबित कर गई कि ठाकुर बांके बिहारी और राधारानी के प्रति भक्तों की आस्था अटूट है और अधिकमास में वृंदावन की आध्यात्मिक महिमा देशभर के श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।
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