परिक्रमा कर लौट रहे श्रद्धालुओं को ट्रेलर ने रौंदा, दो की मौत, 13 घायल...
- 17h ago
वृंदावन। 10 अप्रैल को यमुना में हुए दर्दनाक नाव हादसे में 16 श्रद्धालुओं की मौत के बाद उम्मीद थी कि नाव संचालन में सुरक्षा नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। लेकिन हालात देखकर ऐसा लगता है कि न तो नाव संचालकों ने कोई सबक लिया है और न ही प्रशासन ने।
यमुना घाटों पर आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को बिना लाइफ जैकेट के नावों में बैठाकर नदी पार कराई जा रही है। इतना ही नहीं, कई नावों में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाई जा रही हैं, जिससे कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सामने आई तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि नाव में महिलाएं और श्रद्धालु ठूंस-ठूंसकर बैठे हुए हैं, जबकि किसी के पास भी लाइफ जैकेट नहीं है। ऐसे में यदि नाव का संतुलन बिगड़ जाए या कोई तकनीकी खराबी आ जाए तो हालात बेहद भयावह हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 10 अप्रैल की त्रासदी में कई परिवारों ने अपने परिजन खो दिए थे, लेकिन उसके बावजूद सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कराया जा रहा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है।
अब बड़ा सवाल यह है कि आखिर प्रशासन कब जागेगा? क्या किसी और बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी, या फिर समय रहते सुरक्षा नियमों को सख्ती से लागू कराया जाएगा?
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