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केदारनाथ भारत के सबसे पवित्र और प्रसिद्ध शिव धामों में से एक है। यह उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में हिमालय की गोद में स्थित है और भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल माना जाता है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
‘केदारनाथ’ नाम दो शब्दों से मिलकर बना है—‘केदार’ और ‘नाथ’।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को इस क्षेत्र का स्वामी माना गया, इसलिए उन्हें केदारेश्वर कहा गया और इसी से इस धाम का नाम केदारनाथ पड़ा।
महाभारत युद्ध के बाद पांडव अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लेना चाहते थे। लेकिन शिव उनसे नाराज थे और उनसे मिलने से बचते हुए इस क्षेत्र में छिप गए।
कहा जाता है कि भगवान शिव ने भैंसे (नंदी) का रूप धारण कर लिया। जब पांडवों को इसका आभास हुआ, तो भीम ने उस भैंसे को पकड़ने की कोशिश की। तभी शिव जमीन में समा गए और उनका कुबड़ (पीठ का हिस्सा) केदारनाथ में प्रकट हुआ।
इसी स्थान पर बाद में मंदिर की स्थापना हुई और यह धाम अत्यंत पवित्र माना जाने लगा।
Skanda Purana में केदारनाथ धाम का विस्तृत वर्णन मिलता है। इसमें बताया गया है कि:
स्कंद पुराण के अनुसार, केदारनाथ केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक मोक्षदायिनी भूमि है, जहां देवताओं का वास माना जाता है।
केदारनाथ मंदिर का इतिहास भी उतना ही रोचक है:
2013 में आई भीषण आपदा के बावजूद मंदिर सुरक्षित रहा, जिसे आज भी लोग आस्था का चमत्कार मानते हैं।
केदारनाथ सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का अद्भुत संगम है। इसका नाम भगवान शिव के ‘केदार’ रूप से जुड़ा है, जबकि इसका महत्व स्कंद पुराण और पांडवों की कथा दोनों में गहराई से वर्णित है। यही कारण है कि यह धाम आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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