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- 17h ago
विश्व पर्यावरण दिवस के बीच उत्तर प्रदेश के कानपुर से पर्यावरण को झकझोर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। कानपुर स्थित राष्ट्रीय शुगर संस्थान (NSI) परिसर में 600 से अधिक हरे-भरे पेड़ों की कथित अवैध कटाई और उखाड़े जाने के मामले में संस्थान की निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक महकमे से लेकर पर्यावरण प्रेमियों तक में हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि संस्थान परिसर में लंबे समय से बड़ी संख्या में पेड़ों को काटने और हटाने का काम किया जा रहा था। मामले की शिकायत मिलने के बाद वन विभाग और संबंधित अधिकारियों ने जांच की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि परिसर में सैकड़ों पेड़ों को बिना वैध अनुमति के काटा गया और कई पेड़ों को जड़ समेत उखाड़ दिया गया।
रिपोर्ट के अनुसार कटे हुए पेड़ों में नीम, शीशम, आम, अशोक, यूकेलिप्टस और अन्य छायादार एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण वृक्ष शामिल हैं। आरोप है कि पेड़ों की कटाई के लिए निर्धारित नियमों और पर्यावरणीय मानकों का पालन नहीं किया गया। इतना ही नहीं, कटान के बाद लकड़ियों को भी जल्दबाजी में हटाने का प्रयास किया गया ताकि मामला दबाया जा सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का कटना न केवल पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है, बल्कि इससे क्षेत्र का पारिस्थितिक संतुलन भी प्रभावित होगा। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से तापमान बढ़ने, वायु प्रदूषण में वृद्धि और जैव विविधता पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने राष्ट्रीय शुगर संस्थान की निदेशक समेत पांच लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। प्रशासन यह भी पता लगाने में जुटा है कि पेड़ों की कटाई किसके आदेश पर की गई और क्या इसके लिए कोई वैधानिक अनुमति ली गई थी या नहीं।
घटना सामने आने के बाद पर्यावरण संरक्षण से जुड़े संगठनों ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि सरकारी संस्थानों में ही पर्यावरण नियमों की अनदेखी होगी तो आम लोगों को जागरूक करने के प्रयास कमजोर पड़ जाएंगे। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और काटे गए पेड़ों के बदले बड़े स्तर पर वृक्षारोपण की मांग की है।
इस मामले ने एक बार फिर विकास कार्यों और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को उजागर कर दिया है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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