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- 17h ago
मथुरा का पुराना रोडवेज बस स्टैंड, जहां से प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन होता है, आज बदहाली और अव्यवस्थाओं का प्रतीक बनता जा रहा है। अलीगढ़, हाथरस, कासगंज, सोरों, बदायूं, बरेली, हरिद्वार, ऋषिकेश समेत कई प्रमुख शहरों के लिए यहां से बसों का संचालन होता है, लेकिन यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक है।
बस स्टैंड पर यात्रियों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है। जो टिन शेड यात्रियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए लगाए गए थे, वे खुद जर्जर हो चुके हैं। कई स्थानों पर टिन शेड टूटे हुए हैं, जिससे तेज धूप सीधे यात्रियों पर पड़ती है। गर्मी के मौसम में यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बस स्टैंड पर लगे अधिकांश पंखे भी वर्षों पुराने हैं। कई पंखे खराब पड़े हैं और जो चल रहे हैं, वे भी नाम मात्र की राहत दे पा रहे हैं। वहीं शाम होते ही बस स्टैंड पर अंधेरा छा जाता है, क्योंकि परिसर में लगी कई लाइटें खराब पड़ी हैं। इससे यात्रियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्गों को असुविधा का सामना करना पड़ता है।
रोडवेज विभाग लंबे समय से इस बस स्टैंड के पीपीपी मॉडल पर पुनर्निर्माण और आधुनिकीकरण की बात कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार बस स्टैंड का कायाकल्प किया जाना है, लेकिन पिछले दो से तीन वर्षों से यह योजना केवल कागजों और बैठकों तक ही सीमित दिखाई दे रही है। धरातल पर अभी तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
यात्रियों का कहना है कि जब मथुरा एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन नगरी है, तो यहां के बस अड्डे की स्थिति बेहतर होनी चाहिए। उनका कहना है कि हर दिन हजारों लोग इस बस स्टैंड से सफर करते हैं, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें केवल परेशानी ही मिल रही है।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक यात्रियों को इस बदहाल व्यवस्था का सामना करना पड़ेगा और कब मथुरा के पुराने बस स्टैंड का वास्तविक कायाकल्प देखने को मिलेगा।
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