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- 10h ago
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों के बीच संसद के मानसून सत्र में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बढ़ती नजदीकियां एक बार फिर चर्चा में हैं। संसद से लेकर सड़क तक दोनों नेताओं का एक-दूसरे के समर्थन में खड़ा होना इस बात के संकेत दे रहा है कि विपक्षी एकता अभी भी कायम है।
लोकसभा चुनाव के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन कमजोर पड़ सकता है। कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों और सीट बंटवारे को लेकर उठे सवालों ने भी दोनों दलों के रिश्तों पर संशय पैदा किया था। लेकिन मानसून सत्र के दौरान संसद के भीतर जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने इन अटकलों को काफी हद तक विराम दे दिया।
हाल ही में लोकसभा में राहुल गांधी ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। सत्ता पक्ष के विरोध के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव खुलकर राहुल गांधी के समर्थन में खड़े नजर आए। इसके अलावा बेरोजगारी, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों दल संसद और सड़क पर एकजुट दिखाई दिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान बनी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की राजनीतिक केमिस्ट्री अब भी बरकरार है। दोनों नेता युवाओं, बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे और गठबंधन के स्वरूप पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।
उधर, अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था कि लोकसभा चुनाव का गठबंधन अलग था और विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, इसलिए भविष्य की रणनीति समय आने पर तय की जाएगी। ऐसे में फिलहाल दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल तो दिख रहा है, लेकिन चुनावी गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के रिश्तों को लेकर चल रही अटकलों के बीच संसद के मानसून सत्र में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बढ़ती नजदीकियां एक बार फिर चर्चा में हैं। संसद से लेकर सड़क तक दोनों नेताओं का एक-दूसरे के समर्थन में खड़ा होना इस बात के संकेत दे रहा है कि विपक्षी एकता अभी भी कायम है। लोकसभा चुनाव के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का गठबंधन कमजोर पड़ सकता है। कांग्रेस नेताओं के कुछ बयानों और सीट बंटवारे को लेकर उठे सवालों ने भी दोनों दलों के रिश्तों पर संशय पैदा किया था। लेकिन मानसून सत्र के दौरान संसद के भीतर जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने इन अटकलों को काफी हद तक विराम दे दिया। हाल ही में लोकसभा में राहुल गांधी ने छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और अन्य मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला। सत्ता पक्ष के विरोध के बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव खुलकर राहुल गांधी के समर्थन में खड़े नजर आए। इसके अलावा बेरोजगारी, पेपर लीक और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर भी दोनों दल संसद और सड़क पर एकजुट दिखाई दिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान बनी राहुल गांधी और अखिलेश यादव की राजनीतिक केमिस्ट्री अब भी बरकरार है। दोनों नेता युवाओं, बेरोजगारी और भर्ती परीक्षाओं जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे और गठबंधन के स्वरूप पर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है। उधर, अखिलेश यादव ने हाल ही में कहा था कि लोकसभा चुनाव का गठबंधन अलग था और विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, इसलिए भविष्य की रणनीति समय आने पर तय की जाएगी। ऐसे में फिलहाल दोनों दलों के बीच राजनीतिक तालमेल तो दिख रहा है, लेकिन चुनावी गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है।
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