मां की हत्या करने वाले दोषी को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया ₹26 हजार का जुर्माना...
- 9h ago
साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने ताहिर हुसैन के साथ जावेद, अनस, नाजिम और कासिम (या संबंधित सह-दोषियों) को हत्या, अपहरण, दंगा और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई धाराओं में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इसे "दुर्लभ से दुर्लभतम" मामला बताते हुए सभी दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अंकित शर्मा के शव पर 51 चोटों के निशान मिले थे, जिससे हत्या की क्रूरता स्पष्ट होती है।
हालांकि अदालत ने कहा कि अपराध निस्संदेह अत्यंत जघन्य और समाज को झकझोरने वाला है, लेकिन अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों के सुधार की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने मृत्युदंड की मांग खारिज करते हुए सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। उनका शव बाद में खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले में अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह फैसला आया है।
साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह की अदालत ने ताहिर हुसैन के साथ जावेद, अनस, नाजिम और कासिम (या संबंधित सह-दोषियों) को हत्या, अपहरण, दंगा और विभिन्न समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने सहित कई धाराओं में दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने इसे "दुर्लभ से दुर्लभतम" मामला बताते हुए सभी दोषियों के लिए फांसी की सजा की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अंकित शर्मा के शव पर 51 चोटों के निशान मिले थे, जिससे हत्या की क्रूरता स्पष्ट होती है। हालांकि अदालत ने कहा कि अपराध निस्संदेह अत्यंत जघन्य और समाज को झकझोरने वाला है, लेकिन अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि दोषियों के सुधार की कोई संभावना नहीं है। इसी आधार पर कोर्ट ने मृत्युदंड की मांग खारिज करते हुए सभी दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। गौरतलब है कि फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। उनका शव बाद में खजूरी खास इलाके के एक नाले से बरामद हुआ था। इस मामले में अंकित शर्मा के पिता की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया था, जिसके बाद लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद यह फैसला आया है।
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