परिक्रमा कर लौट रहे श्रद्धालुओं को ट्रेलर ने रौंदा, दो की मौत, 13 घायल...
- 18h ago
हाथरस के चकबंदी विभाग में भ्रष्टाचार और न्याय न मिलने से परेशान एक किसान ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर आत्मदाह की कोशिश की। किसान अपने साथ डीजल लेकर पहुंचा और खुद पर डीजल डाल लिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। वहां मौजूद लोगों और अधिकारियों ने किसी तरह उसे रोका। घटना के बाद चकबंदी विभाग में हड़कंप मच गया।
पीड़ित किसान देवेंद्र ने आरोप लगाया कि उनकी जमीन को लेकर परिवार का मुकदमा वर्ष 2012 से चल रहा है। उनके पिता राजवीर शर्मा ने वर्ष 1994 में जमीन का बैनामा कराया था। वर्ष 2019 में मामला एटा बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के पास पहुंचा था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 6 अगस्त 2025 को फैसला उनके पक्ष में आया।
देवेंद्र सिंह का कहना है कि एसओसी कोर्ट से फैसला आने के बाद फाइल चकबंदी अधिकारी अनिल कुमार के पास पहुंची, लेकिन आदेश के अनुपालन के नाम पर उन्हें लगातार परेशान किया गया। किसान ने आरोप लगाया कि अधिकारी द्वारा काम कराने के लिए 20 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई।
पैसे की व्यवस्था करने के लिए उन्हें अपनी भैंस 40 हजार रुपये में बेचनी पड़ी। आरोप है कि रुपये देने के बावजूद भी उनका काम नहीं किया गया और बाद में प्रार्थना पत्र ही खारिज कर दिया गया।
वहीं इस मामले में चकबंदी अधिकारी अनिल कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि मामला अभी डीडीसी कोर्ट में विचाराधीन है और अंतिम आदेश नहीं हुआ है।
इसी कारण प्रार्थना पत्र खारिज किया गया था।
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