मां की हत्या करने वाले दोषी को उम्रकैद, कोर्ट ने लगाया ₹26 हजार का जुर्माना...
- 10h ago
मथुरा के गोवर्धन में भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पहले नगर में मोटरसाइकिल रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, इसके बाद तहसील पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा।
इस दौरान भाकियू चढ़ूनी के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना था कि यदि यह समझौता लागू होता है तो विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय कारोबार पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
किसान नेताओं ने कहा कि देश का अन्नदाता पहले से ही बढ़ती लागत, घटते मुनाफे और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में इस तरह का व्यापार समझौता किसानों की समस्याओं को और बढ़ा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रस्तावित समझौते को तत्काल निरस्त करने और किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की।
भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी।
प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे। ज्ञापन सौंपने के बाद सभी ने सरकार से किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने की अपील की।
मथुरा के गोवर्धन में भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (चढ़ूनी गुट) ने जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पहले नगर में मोटरसाइकिल रैली निकालकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की, इसके बाद तहसील पहुंचकर प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। इस दौरान भाकियू चढ़ूनी के नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता किसानों, खेत मजदूरों, पशुपालकों और छोटे व्यापारियों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना था कि यदि यह समझौता लागू होता है तो विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भारतीय कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय कारोबार पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। किसान नेताओं ने कहा कि देश का अन्नदाता पहले से ही बढ़ती लागत, घटते मुनाफे और प्राकृतिक आपदाओं जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में इस तरह का व्यापार समझौता किसानों की समस्याओं को और बढ़ा सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रस्तावित समझौते को तत्काल निरस्त करने और किसानों के हितों की रक्षा करने की मांग की। भाकियू नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की होगी। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे। ज्ञापन सौंपने के बाद सभी ने सरकार से किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लेने की अपील की।
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