रंगदारी नहीं दी तो घर में घुसकर हमला! मां की चेन और पत्नी का मंगलसूत्र...
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वृंदावन के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। मंदिर प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि अब मंदिर की हाई पावर कमेटी में गोस्वामी समाज के प्रतिनिधियों का चयन प्रशासनिक अधिकारियों की मर्जी से नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया के जरिए होगा।
जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्य बागची की पीठ ने आदेश देते हुए कहा कि राजभोग और शयन भोग सेवायत परंपरा से दो-दो निर्वाचित प्रतिनिधियों को समिति में शामिल किया जाए।
कोर्ट के निर्देश के अनुसार शयन भोग परंपरा से गोपेश गोस्वामी और हिमांशु गोस्वामी, जबकि राजभोग परंपरा से रजत गोस्वामी और शैलेंद्र गोस्वामी को हाई पावर कमेटी का सदस्य नियुक्त किया गया है।
यह फैसला उस याचिका पर आया है जिसमें आरोप लगाया गया था कि पिछले वर्ष प्रशासन ने गोस्वामी समाज की सहमति के बिना अपने पसंदीदा प्रतिनिधियों को समिति में शामिल कर लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को भी सख्त निर्देश देते हुए कहा है कि मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाए। कोर्ट ने सड़क चौड़ीकरण, पेयजल, अस्पताल, वेटिंग एरिया और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के लिए बैटरी वाहन जैसी सुविधाएं विकसित करने को कहा है।
साथ ही कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि स्थानीय निवासियों और गोस्वामी समाज के सुझावों के आधार पर एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार कर अदालत में पेश की जाए। इस फैसले को गोस्वामी समाज और श्रद्धालुओं के लिए बड़ी राहत और मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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