रंगदारी नहीं दी तो घर में घुसकर हमला! मां की चेन और पत्नी का मंगलसूत्र...
- 4h ago
अधिक मास के पावन अवसर पर मथुरा स्थित प्राचीन रंगेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे भक्त भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और दान-पुण्य कर रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिक मास, जिसे मल मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, तीन वर्ष में एक बार आता है। इस दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इस पवित्र माह में व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं।
ब्रज क्षेत्र में चल रही 84 कोस परिक्रमा के चलते भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में परिक्रमार्थी रंगेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं।
मंदिर के सेवायत ने बताया कि अधिक मास में श्रद्धा भाव से किए गए दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक समय भगवान की भक्ति और धार्मिक कार्यों में लगाने की अपील की।
साथ ही मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने का अनुरोध किया है। सेवायतों ने कहा कि प्रसाद और पूजन सामग्री इधर-उधर न फेंकें, बल्कि डस्टबिन का उपयोग करें ताकि मंदिर परिसर साफ-सुथरा बना रहे।
अधिक मास के पावन अवसर पर मथुरा स्थित प्राचीन रंगेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे भक्त भगवान शिव के दर्शन कर पूजा-अर्चना, जलाभिषेक और दान-पुण्य कर रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार अधिक मास, जिसे मल मास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, तीन वर्ष में एक बार आता है। इस दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु इस पवित्र माह में व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के जरिए पुण्य लाभ अर्जित कर रहे हैं। ब्रज क्षेत्र में चल रही 84 कोस परिक्रमा के चलते भी मंदिरों में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। बड़ी संख्या में परिक्रमार्थी रंगेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर दर्शन कर रहे हैं। मंदिर के सेवायत ने बताया कि अधिक मास में श्रद्धा भाव से किए गए दान-पुण्य और धार्मिक कार्यों का विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक समय भगवान की भक्ति और धार्मिक कार्यों में लगाने की अपील की। साथ ही मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने का अनुरोध किया है। सेवायतों ने कहा कि प्रसाद और पूजन सामग्री इधर-उधर न फेंकें, बल्कि डस्टबिन का उपयोग करें ताकि मंदिर परिसर साफ-सुथरा बना रहे।
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