धौलपुर में सुबह 5 से 9 बजे तक विशेष नाकाबंदी, एक दर्जन वाहन चालकों के...
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मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा में श्री बाल रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को कोप भवन, मंथरा-कैकेयी संवाद, राजा दशरथ से दो वरदान मांगने और प्रभु श्रीराम के वनगमन की तैयारी से जुड़ी लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु धार्मिक प्रसंगों को देखकर भावविभोर हो गए।
रामलीला मंचन के दौरान माता कैकेयी के कोप भवन में जाने और दासी मंथरा के साथ उनके संवाद का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। मंथरा के संवाद के बाद माता कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगे। उन्होंने पहले वरदान में पुत्र भरत के लिए राजगद्दी और दूसरे वरदान में प्रभु श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा।
इस प्रसंग का मंचन देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए। राजा दशरथ के सामने उत्पन्न हुई धर्मसंकट की स्थिति और माता कैकेयी के वरदानों ने रामलीला के वातावरण को भावनात्मक बना दिया।
लीला के अगले प्रसंग में प्रभु श्रीराम द्वारा पिता राजा दशरथ के वचनों की मर्यादा बनाए रखने के लिए 14 वर्ष के वनवास पर जाने की तैयारी का मंचन किया गया। कलाकारों ने इस प्रसंग को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के त्याग, आज्ञापालन और मर्यादा के आदर्शों का स्मरण किया।
श्री बाल रामलीला कमेटी के इस आयोजन में धर्मप्रेमी जनता ने लीला के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रीरामलीला महोत्सव के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा में श्री बाल रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित श्रीरामलीला महोत्सव के अंतर्गत शनिवार को कोप भवन, मंथरा-कैकेयी संवाद, राजा दशरथ से दो वरदान मांगने और प्रभु श्रीराम के वनगमन की तैयारी से जुड़ी लीलाओं का भावपूर्ण मंचन किया गया। लीला के दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालु धार्मिक प्रसंगों को देखकर भावविभोर हो गए। रामलीला मंचन के दौरान माता कैकेयी के कोप भवन में जाने और दासी मंथरा के साथ उनके संवाद का प्रसंग प्रस्तुत किया गया। मंथरा के संवाद के बाद माता कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगे। उन्होंने पहले वरदान में पुत्र भरत के लिए राजगद्दी और दूसरे वरदान में प्रभु श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। इस प्रसंग का मंचन देखकर उपस्थित श्रद्धालु भावुक हो गए। राजा दशरथ के सामने उत्पन्न हुई धर्मसंकट की स्थिति और माता कैकेयी के वरदानों ने रामलीला के वातावरण को भावनात्मक बना दिया। लीला के अगले प्रसंग में प्रभु श्रीराम द्वारा पिता राजा दशरथ के वचनों की मर्यादा बनाए रखने के लिए 14 वर्ष के वनवास पर जाने की तैयारी का मंचन किया गया। कलाकारों ने इस प्रसंग को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम के त्याग, आज्ञापालन और मर्यादा के आदर्शों का स्मरण किया। श्री बाल रामलीला कमेटी के इस आयोजन में धर्मप्रेमी जनता ने लीला के दर्शन कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। श्रीरामलीला महोत्सव के माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
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