धौलपुर में सुबह 5 से 9 बजे तक विशेष नाकाबंदी, एक दर्जन वाहन चालकों के...
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मथुरा। धौली प्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड में आयोजित ब्रज उत्सव की 31 अक्टूबर की शाम अशोका ट्रैवेल्स, मथुरा के ओनर शरद अग्रवाल की सुरीली प्रस्तुतियों के नाम रही। उन्होंने लगातार तीन लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में नई उमंग और उत्साह भर दिया। उनकी गायकी ने दर्शकों को भावनाओं और संगीत के खूबसूरत रंगों से सराबोर कर दिया।
शरद अग्रवाल ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत फिल्म ‘नाम’ के लोकप्रिय गीत ‘चिट्ठी आई है’ से की। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘बॉर्डर’ का मशहूर गीत ‘संदेशे आते हैं’ प्रस्तुत किया। इस गीत ने माहौल को भावुक बना दिया। उनकी तीसरी प्रस्तुति फिल्म ‘कल हो ना हो’ का शीर्षक गीत रही, जिसकी शुरुआत ‘हर घड़ी बदल रही है रूप ज़िंदगी’ पंक्ति से होती है।
एक के बाद एक तीन लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति ने महफिल में रंग जमा दिया। सुरों और भावनाओं से सजी उनकी गायकी ने ब्रज उत्सव की शाम को यादगार बना दिया।
मंच पर शरद अग्रवाल की सहज प्रस्तुति और संगीत के प्रति उनका लगाव दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। देश-विदेश के कलाकारों की भागीदारी से सजे ब्रज उत्सव में मथुरा की स्थानीय प्रतिभा की भी शानदार झलक देखने को मिली।
शरद अग्रवाल की प्रस्तुति ने यह दिखाया कि ब्रज की सांस्कृतिक धरती पर संगीत के प्रति लोगों का उत्साह लगातार बना हुआ है। उनकी सुरीली प्रस्तुतियों के साथ ब्रज उत्सव की यह शाम संगीत प्रेमियों के लिए खास बन गई।
मथुरा। धौली प्याऊ स्थित रेलवे ग्राउंड में आयोजित ब्रज उत्सव की 31 अक्टूबर की शाम अशोका ट्रैवेल्स, मथुरा के ओनर शरद अग्रवाल की सुरीली प्रस्तुतियों के नाम रही। उन्होंने लगातार तीन लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में नई उमंग और उत्साह भर दिया। उनकी गायकी ने दर्शकों को भावनाओं और संगीत के खूबसूरत रंगों से सराबोर कर दिया। शरद अग्रवाल ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत फिल्म ‘नाम’ के लोकप्रिय गीत ‘चिट्ठी आई है’ से की। इसके बाद उन्होंने फिल्म ‘बॉर्डर’ का मशहूर गीत ‘संदेशे आते हैं’ प्रस्तुत किया। इस गीत ने माहौल को भावुक बना दिया। उनकी तीसरी प्रस्तुति फिल्म ‘कल हो ना हो’ का शीर्षक गीत रही, जिसकी शुरुआत ‘हर घड़ी बदल रही है रूप ज़िंदगी’ पंक्ति से होती है। एक के बाद एक तीन लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति ने महफिल में रंग जमा दिया। सुरों और भावनाओं से सजी उनकी गायकी ने ब्रज उत्सव की शाम को यादगार बना दिया। मंच पर शरद अग्रवाल की सहज प्रस्तुति और संगीत के प्रति उनका लगाव दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहा। देश-विदेश के कलाकारों की भागीदारी से सजे ब्रज उत्सव में मथुरा की स्थानीय प्रतिभा की भी शानदार झलक देखने को मिली। शरद अग्रवाल की प्रस्तुति ने यह दिखाया कि ब्रज की सांस्कृतिक धरती पर संगीत के प्रति लोगों का उत्साह लगातार बना हुआ है। उनकी सुरीली प्रस्तुतियों के साथ ब्रज उत्सव की यह शाम संगीत प्रेमियों के लिए खास बन गई।
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