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- 11h ago
नई दिल्ली। लंबे समय से विवादों में रहने वाली आध्यात्मिक हस्ती राधे मां ने पहली बार अपने निजी जीवन और अपने ऊपर लगे आरोपों पर खुलकर बात की है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने कभी खुद को संत या साधु नहीं बताया और न ही ऐसा कोई दावा किया।
राधे मां ने कहा, "मैं संत नहीं हूं, मैं राधे हूं... दूसरों को राह दिखाने वाली।" उन्होंने बताया कि उनका श्रृंगार उनके भक्तों और परिवार की इच्छा से होता है और उन्होंने कभी खुद को पारंपरिक संत के रूप में प्रस्तुत नहीं किया।
भक्तों से पैसे लेने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी से धन नहीं मांगा। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी श्रद्धा से भेंट या दान देता है तो उसे वह मना नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी आस्था के कारण स्वेच्छा से चढ़ावा चढ़ाते हैं।
राधे मां ने यह भी बताया कि वह शादीशुदा हैं और उनके बच्चे चाहते हैं कि वह सज-धज कर रहें। उन्होंने कहा कि उनके बारे में पैसे लेने जैसी खबरों से उन्हें काफी दुख पहुंचा।
अपने जीवन के कठिन दौर का जिक्र करते हुए राधे मां ने कहा कि विवादों के बाद वह लगभग तीन वर्षों तक अवसाद (डिप्रेशन) में रहीं और इलाज के बाद इस स्थिति से बाहर निकल सकीं। उन्होंने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि आज लोग भगवान से ज्यादा पैसे के पीछे भाग रहे हैं।
नई दिल्ली। लंबे समय से विवादों में रहने वाली आध्यात्मिक हस्ती राधे मां ने पहली बार अपने निजी जीवन और अपने ऊपर लगे आरोपों पर खुलकर बात की है। एक विशेष बातचीत में उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने कभी खुद को संत या साधु नहीं बताया और न ही ऐसा कोई दावा किया। राधे मां ने कहा, "मैं संत नहीं हूं, मैं राधे हूं... दूसरों को राह दिखाने वाली।" उन्होंने बताया कि उनका श्रृंगार उनके भक्तों और परिवार की इच्छा से होता है और उन्होंने कभी खुद को पारंपरिक संत के रूप में प्रस्तुत नहीं किया। भक्तों से पैसे लेने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी किसी से धन नहीं मांगा। उनके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी श्रद्धा से भेंट या दान देता है तो उसे वह मना नहीं करतीं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी आस्था के कारण स्वेच्छा से चढ़ावा चढ़ाते हैं। राधे मां ने यह भी बताया कि वह शादीशुदा हैं और उनके बच्चे चाहते हैं कि वह सज-धज कर रहें। उन्होंने कहा कि उनके बारे में पैसे लेने जैसी खबरों से उन्हें काफी दुख पहुंचा। अपने जीवन के कठिन दौर का जिक्र करते हुए राधे मां ने कहा कि विवादों के बाद वह लगभग तीन वर्षों तक अवसाद (डिप्रेशन) में रहीं और इलाज के बाद इस स्थिति से बाहर निकल सकीं। उन्होंने इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म बताते हुए कहा कि आज लोग भगवान से ज्यादा पैसे के पीछे भाग रहे हैं।
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