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- 12h ago
आंध्र प्रदेश में इंसानों और जंगली हाथियों के बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब दो प्रशिक्षित कुमकी हाथियों—जयंत और अभिमन्यु—को प्रभावित इलाके में तैनात करने जा रही है। इन हाथियों की मदद से जंगली झुंडों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश की जाएगी।
आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले में जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक से ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं।
ओडिशा से आने वाले जंगली हाथियों के झुंड लगातार खेतों में नुकसान पहुंचा रहे हैं और लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने विशेष रूप से प्रशिक्षित कुमकी हाथियों जयंत और अभिमन्यु को गुचिमी कैंप में तैनात करने का फैसला किया है।
वन विभाग के अनुसार, दोनों कुमकी हाथियों को जंगली हाथियों को नियंत्रित करने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से जंगल की ओर वापस ले जाने का लंबा अनुभव है। ये पहले भी कई सफल रेस्क्यू और नियंत्रण अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं।
सरकार का कहना है कि इस कदम से सीमावर्ती गांवों में फसल नुकसान कम होगा और लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी। साथ ही, ओडिशा सरकार के साथ मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान पर भी काम किया जा रहा है।
आंध्र प्रदेश में इंसानों और जंगली हाथियों के बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए वन विभाग ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार अब दो प्रशिक्षित कुमकी हाथियों—जयंत और अभिमन्यु—को प्रभावित इलाके में तैनात करने जा रही है। इन हाथियों की मदद से जंगली झुंडों को आबादी वाले क्षेत्रों से दूर रखने की कोशिश की जाएगी। आंध्र प्रदेश के पार्वतीपुरम मान्यम जिले में जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक से ग्रामीण लंबे समय से परेशान हैं। ओडिशा से आने वाले जंगली हाथियों के झुंड लगातार खेतों में नुकसान पहुंचा रहे हैं और लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन रहे हैं। ऐसे में राज्य सरकार ने विशेष रूप से प्रशिक्षित कुमकी हाथियों जयंत और अभिमन्यु को गुचिमी कैंप में तैनात करने का फैसला किया है। वन विभाग के अनुसार, दोनों कुमकी हाथियों को जंगली हाथियों को नियंत्रित करने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्रों से जंगल की ओर वापस ले जाने का लंबा अनुभव है। ये पहले भी कई सफल रेस्क्यू और नियंत्रण अभियानों का हिस्सा रह चुके हैं। सरकार का कहना है कि इस कदम से सीमावर्ती गांवों में फसल नुकसान कम होगा और लोगों की सुरक्षा बेहतर होगी। साथ ही, ओडिशा सरकार के साथ मिलकर इस समस्या के स्थायी समाधान पर भी काम किया जा रहा है।
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