शिक्षा क्षेत्र को बड़ी सौगात: सीएम योगी ने शुरू की शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना, 1.10 करोड़ छात्रों को डीबीटी से ₹1200

  • 4 days ago
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वाराणसी/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी स्थित दीनदयाल हस्तकला संकुल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने 'मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना' की शुरुआत करते हुए प्रदेश के लगभग 12 लाख शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों एवं उनके आश्रितों को स्वास्थ्य सुरक्षा की बड़ी सौगात दी।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 1.10 करोड़ विद्यार्थियों के अभिभावकों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से प्रति छात्र 1,200 रुपये की राशि भी हस्तांतरित की। यह धनराशि यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, स्वेटर, स्कूल बैग और स्टेशनरी की खरीद के लिए दी गई है।

इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के साथ एक महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत करीब 10 लाख शिक्षकों एवं संविदा कर्मियों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें ग्रुप टर्म लाइफ इंश्योरेंस, व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, दिव्यांगता कवर, एयर एक्सीडेंट कवर के साथ बच्चों की शिक्षा और पुत्रियों के विवाह के लिए भी विशेष सहायता का प्रावधान किया गया है।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर पर चयनित 12 स्वच्छ एवं हरित विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं प्रधानाध्यापकों को 'स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार' से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षक केवल पाठ्यपुस्तक नहीं पढ़ाता, बल्कि राष्ट्र के भविष्य का निर्माण करता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षकों की कैशलेस चिकित्सा सुविधा की मांग थी, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरा कर दिया है। अब शिक्षकों को इलाज के लिए आर्थिक चिंता नहीं करनी पड़ेगी।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डीबीटी व्यवस्था ने पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है और योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थियों तक पहुंच रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (ड्रॉपआउट) की दर लगभग 15 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 3 प्रतिशत से भी नीचे आ गई है। साथ ही, सभी कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को 12वीं तक उच्चीकृत किया जा चुका है तथा जिन विकास खंडों में ऐसे विद्यालय नहीं हैं, वहां नए विद्यालय स्थापित किए जाएंगे।

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