स्वीटी सुपारी परिवार की अनूठी पहल, स्व. सुरेश चन्द्र अग्रवाल की स्मृति में मेगा हेल्थ...
- 10h ago
मथुरा। मथुरा में मंगलवार को हुई महज 15 मिनट की तेज बारिश ने शहर की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की हकीकत एक बार फिर सबके सामने ला दी। शहर का हृदय स्थल होली गेट, भूतेश्वर पुल, न्यू बस स्टैंड अंडरपास, बीएसए से भूतेश्वर रोड, महोली रोड, प्रकाश नगर और कंकाली रोड समेत कई प्रमुख इलाके जलभराव की चपेट में आ गए। सड़कों पर कई फीट तक पानी भरने से यातायात ठप हो गया, बाजारों में लोगों की आवाजाही प्रभावित रही और रोजमर्रा की जिंदगी अस्त-व्यस्त हो गई।
सबसे भयावह स्थिति न्यू बस स्टैंड पुल के नीचे देखने को मिली, जहां बारिश के बाद करीब 8 फीट तक पानी जमा हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि आसपास के नालों में महीनों से जमा कचरे और समय पर सफाई नहीं होने के कारण बारिश का पानी सीधे अंडरपास में भर गया। लोगों का सवाल है कि यदि बरसात से पहले नालों की सफाई कर दी जाती, तो क्या ऐसे हालात पैदा होते?
होली गेट जैसे शहर के सबसे व्यस्त बाजार में नालों का गंदा पानी सड़कों पर बहता नजर आया। व्यापारियों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी हुई, जबकि ग्राहकों को घुटनों तक पानी से होकर गुजरना पड़ा। भूतेश्वर पुल पर जलभराव के कारण घंटों तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। वहीं बीएसए रोड, महोली रोड, प्रकाश नगर और कंकाली रोड में भी जल निकासी की व्यवस्था नाकाम साबित हुई और सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। हर मानसून में यही दृश्य सामने आते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते। बरसात से पहले नालों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त करने के दावे हर वर्ष किए जाते हैं, लेकिन पहली ही तेज बारिश उन दावों की हकीकत उजागर कर देती है।
अब शहर में एक ही सवाल गूंज रहा है—जब समस्याएं वर्षों पुरानी हैं, तो उनके समाधान की जिम्मेदारी कौन लेगा? मथुरा में एक सांसद, पांच विधायक, महापौर, नगर निगम और संबंधित विभाग होने के बावजूद यदि शहर के प्रमुख मार्ग मामूली बारिश में ही जलमग्न हो जाते हैं, तो विकास के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ब्रेकिंग न्यूज़, एक्सक्लूसिव रिपोर्ट और ताज़ा वीडियो सबसे पहले पाएं
ब्रेकिंग न्यूज़, वायरल वीडियो और हर बड़ी अपडेट सीधे अपने मोबाइल पर