मथुरा में करंट का कहर: तीन गौ माताओं की मौत, गौ रक्षकों ने नगर निगम और बिजली विभाग को दिया 5 दिन का अल्टीमेटम

  • 3 days ago
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मथुरा। कान्हा की नगरी मथुरा में बुधवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश के बाद नगर निगम और बिजली विभाग की कथित लापरवाही एक बार फिर सामने आई। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में बिजली के खंभों में उतरे करंट की चपेट में आने से तीन गौ माताओं की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद गौ रक्षकों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया। गौ रक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि पांच दिनों के भीतर सभी खतरनाक बिजली के खंभों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो प्रशासन के खिलाफ बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

जानकारी के अनुसार, हालनगंज, लालगंज और महाविद्या कॉलोनी क्षेत्र में बारिश के दौरान बिजली के खंभों में करंट उतर आया। सड़क पर घूम रही तीन गायें इसकी चपेट में आ गईं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने बिजली विभाग तथा नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

सूचना मिलते ही गो रक्षा विभाग के संगठन मंत्री हेमंत कुमार शर्मा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने कहा कि शहर में बड़ी संख्या में लोग दूध निकालने के बाद गायों को सड़कों पर बेसहारा छोड़ देते हैं। उन्होंने बताया कि करंट से मरी गायें आवारा नहीं थीं, बल्कि उन्हें उनके मालिकों ने दूध निकालने के बाद सड़क पर छोड़ दिया था। दुखद बात यह रही कि मौत के बाद भी कोई मालिक उन्हें लेने नहीं पहुंचा।

हेमंत शर्मा ने बताया कि घटना के बाद नगर निगम के सहयोग से सड़कों पर घूम रहे अन्य गोवंश को रेस्क्यू कर सुरक्षित गौशालाओं में भेजा गया, ताकि आगे किसी और बेजुबान की जान न जाए।

गौ रक्षकों ने नगर निगम और बिजली विभाग को पांच दिन का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि शहर के सभी बिजली के खंभों की जांच कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो छठे दिन से प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होगी।

लगातार हो रही इन घटनाओं ने शहर की विद्युत सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते दो दिनों में करंट लगने से कई गौवंशों की मौत की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे में स्थानीय लोग भी मांग कर रहे हैं कि बारिश के मौसम में बिजली के पोल, ट्रांसफार्मर और विद्युत लाइनों की तत्काल जांच कर आवश्यक सुधार कार्य किए जाएं, ताकि किसी बड़े हादसे से पहले स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

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