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- 10h ago
मथुरा में करोड़ों रुपये की जमीन हेराफेरी से जुड़े चर्चित मामले में पुलिस और अभियोजन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला Kaila Devi Real Estate Limited से जुड़ा है, जहां पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि जांच के दौरान आरोपियों को बचाने के लिए पूरे मामले को रफा-दफा कर दिया गया।
कंपनी प्रतिनिधि डिगम्बर सिंह का आरोप है कि शेयर होल्डर कान्ति प्रसाद ने कथित रूप से अपनी पुत्रवधू नमीता अग्रवाल को फर्जी डायरेक्टर बनाकर कंपनी के नाम पर जाली खाते खुलवाए और करोड़ों रुपये की जमीन खुर्द-बुर्द कर दी। पीड़ित पक्ष का कहना है कि शुरुआती जांच में उनके पक्ष में पर्याप्त साक्ष्य मिले थे और चार बार विधिक राय में अपराध साबित होने की बात सामने आई थी।
हालांकि, पांचवीं विधिक राय में अचानक पूरा मामला बदल गया और कोई अपराध न होने की फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई। इसी को लेकर अब पुलिस और अभियोजन विभाग की भूमिका सवालों के घेरे में है।
कंपनी की अधिवक्ता जयश्री श्रीवास्तव और भूपेंद्र कुमार उपाध्याय ने आरोप लगाया कि नियमों के विपरीत जाकर विवेचना अधिकारी को बदला गया। उनका कहना है कि थाना प्रभारी को स्वयं विवेचना बदलने का अधिकार नहीं होता, जबकि इस मामले में बिना किसी प्रार्थना पत्र के विवेचना सुनील यादव को सौंप दी गई।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि जब वे एसआईटी और क्राइम ब्रांच से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे, उसी दौरान अधिकारियों ने कागजों में विधिक राय लेने की प्रक्रिया के जरिए मामले को कमजोर करने का प्रयास किया।
फिलहाल यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। पीड़ित पक्ष ने साफ कहा है कि वे इस मामले में न्याय के लिए लखनऊ से लेकर दिल्ली तक कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग जारी रखेंगे।
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