संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से गायब 16 वर्षीय किशोर बरसाना से बरामद, 3 महीने...
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मथुरा। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े विवाद के बीच कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपने कथा कार्यक्रम के दौरान संत प्रेमानंद महाराज के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने और बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की पूरी जानकारी के बिना किसी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आज के दौर में कुछ लोग किसी भी मामले पर टिप्पणी करने से पीछे नहीं हटते। उनके मुताबिक, और पूरी सच्चाई सामने आने से पहले ही फैसले सुनाए जा रहे हैं।
संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े मृत्यु के मामले का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई है तो इसके लिए संत प्रेमानंद महाराज को जिम्मेदार ठहराना कहां तक उचित है। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मामले की पूरी जांच और तथ्यों को सामने आना चाहिए।
उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के आध्यात्मिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रवचनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े हैं और लोगों को सनातन धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली है।
अनिरुद्धाचार्य ने आलोचना करने वालों पर तंज कसते हुए “मेंढक टर-टर करते हैं तो कोयल चुप हो जाती है” जैसी टिप्पणी भी की। उन्होंने “विनाश काले विपरीत बुद्धि” कहावत का भी उल्लेख किया।
उनके बयान के बाद संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े मामले में संतों के समर्थन और मीडिया की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, पूरे मामले से जुड़े आरोपों और दावों पर अंतिम स्थिति जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
मथुरा। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े विवाद के बीच कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज ने अपने कथा कार्यक्रम के दौरान संत प्रेमानंद महाराज के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने और बिना पूरी जानकारी के टिप्पणी करने वालों पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले की पूरी जानकारी के बिना किसी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। अनिरुद्धाचार्य ने कहा कि आज के दौर में कुछ लोग किसी भी मामले पर टिप्पणी करने से पीछे नहीं हटते। उनके मुताबिक, और पूरी सच्चाई सामने आने से पहले ही फैसले सुनाए जा रहे हैं। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े मृत्यु के मामले का जिक्र करते हुए अनिरुद्धाचार्य ने सवाल उठाया कि यदि किसी व्यक्ति की मृत्यु हुई है तो इसके लिए संत प्रेमानंद महाराज को जिम्मेदार ठहराना कहां तक उचित है। उन्होंने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मामले की पूरी जांच और तथ्यों को सामने आना चाहिए। उन्होंने संत प्रेमानंद महाराज के आध्यात्मिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रवचनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु जुड़े हैं और लोगों को सनातन धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली है। अनिरुद्धाचार्य ने आलोचना करने वालों पर तंज कसते हुए “मेंढक टर-टर करते हैं तो कोयल चुप हो जाती है” जैसी टिप्पणी भी की। उन्होंने “विनाश काले विपरीत बुद्धि” कहावत का भी उल्लेख किया। उनके बयान के बाद संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े मामले में संतों के समर्थन और मीडिया की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वहीं, पूरे मामले से जुड़े आरोपों और दावों पर अंतिम स्थिति जांच और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
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