राजेंद्र सिंह सिकरवार के निधन पर मथुरा पहुंचे जयंत चौधरी, नम आंखों से दी श्रद्धांजलि...
- 11h ago
मथुरा: पुष्टिमार्ग संप्रदाय के प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश मंदिर में सावन मास की पारंपरिक काली घटा मनोरथ के तहत शनिवार को राजाधिराज श्री द्वारिकाधीश महाराज काली घटा में विराजमान हुए। मंदिर प्रांगण में भगवान के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी।
पुष्टिमार्ग की परंपरा के अनुसार मंदिर के सभी उत्सव एवं मनोरथों का निर्धारण मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉ. वागीश कुमार जी महाराज (कांकरोली नरेश, तृतीय पीठ) द्वारा किया जाता है। उसी परंपरा के अंतर्गत ठाकुरजी को सावन की ऋतु का अनुभव कराने के लिए काली घटा का विशेष आयोजन किया गया।
इस अवसर पर पूरे मंदिर को काले वस्त्रों, आकर्षक पुष्प सज्जा और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप दिया गया। मंदिर परिसर में कृत्रिम रूप से काले बादलों की गर्जना, बिजली की चमक और पक्षियों की मधुर चहचहाहट की ध्वनियों से ऐसा वातावरण बनाया गया, मानो सावन की घटाएं वास्तव में मंदिर में उतर आई हों।
मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा में घटा और हिंडोला का विशेष महत्व है। “घटा” का उद्देश्य ठाकुरजी को बाहर के प्राकृतिक मौसम की अनुभूति कराना है, ताकि उन्हें ऋतु के अनुरूप लाड़-लड़ाया जा सके। यह मनोरथ पूरे सावन मास तक विभिन्न स्वरूपों में जारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि रविवार सायं 5:10 बजे से 5:40 बजे तक ठाकुर श्री द्वारिकाधीश जी केसरी मखमल के भव्य हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर इस दिव्य मनोरथ के दर्शन करने की अपील की है।
मथुरा: पुष्टिमार्ग संप्रदाय के प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश मंदिर में सावन मास की पारंपरिक काली घटा मनोरथ के तहत शनिवार को राजाधिराज श्री द्वारिकाधीश महाराज काली घटा में विराजमान हुए। मंदिर प्रांगण में भगवान के इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। द्वारकाधीश मंदिर में सावन की अनूठी परंपरा, काले बादलों और बिजली की गूंज से सजा दिव्य दरबार पुष्टिमार्ग की परंपरा के अनुसार मंदिर के सभी उत्सव एवं मनोरथों का निर्धारण मंदिर के गोस्वामी श्री श्री 108 डॉ. वागीश कुमार जी महाराज (कांकरोली नरेश, तृतीय पीठ) द्वारा किया जाता है। उसी परंपरा के अंतर्गत ठाकुरजी को सावन की ऋतु का अनुभव कराने के लिए काली घटा का विशेष आयोजन किया गया। इस अवसर पर पूरे मंदिर को काले वस्त्रों, आकर्षक पुष्प सज्जा और रंग-बिरंगी रोशनी से भव्य रूप दिया गया। मंदिर परिसर में कृत्रिम रूप से काले बादलों की गर्जना, बिजली की चमक और पक्षियों की मधुर चहचहाहट की ध्वनियों से ऐसा वातावरण बनाया गया, मानो सावन की घटाएं वास्तव में मंदिर में उतर आई हों। मंदिर के मीडिया प्रभारी राकेश तिवारी ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा में घटा और हिंडोला का विशेष महत्व है। “घटा” का उद्देश्य ठाकुरजी को बाहर के प्राकृतिक मौसम की अनुभूति कराना है, ताकि उन्हें ऋतु के अनुरूप लाड़-लड़ाया जा सके। यह मनोरथ पूरे सावन मास तक विभिन्न स्वरूपों में जारी रहेगा। उन्होंने बताया कि रविवार सायं 5:10 बजे से 5:40 बजे तक ठाकुर श्री द्वारिकाधीश जी केसरी मखमल के भव्य हिंडोले में विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से समय पर पहुंचकर इस दिव्य मनोरथ के दर्शन करने की अपील की है।
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