कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 1.10 लाख रुपये और चोरी के कपड़ों के साथ आरोपी...
- 14h ago
वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार और मल्टी मॉडल टर्मिनल परियोजना के बीच एक नया विवाद सामने आ गया है। रेलवे प्रशासन ने स्टेशन परिसर के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को 20 जून तक हटाने का नोटिस जारी किया है। नोटिस के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और मस्जिद प्रबंधन ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
रेलवे का दावा है कि मस्जिद रेलवे की भूमि पर बनी हुई है और काशी स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रही है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक निर्माण नहीं हटाया गया तो रेलवे प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। यह कदम काशी स्टेशन को आधुनिक मल्टी मॉडल टर्मिनल के रूप में विकसित करने की परियोजना के तहत उठाया गया है।
दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े पक्षों और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने नोटिस को भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है और इसका अस्तित्व रेलवे के आने से पहले का है। कमेटी ने दावा किया है कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगी और मस्जिद को अवैध बताने के दावे का विरोध करेगी।
बताया जा रहा है कि काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत खर्च की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य रेलवे, बस और जल परिवहन को एकीकृत कर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे पहले भी स्टेशन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई संरचनाएं हटाई जा चुकी हैं।
फिलहाल सभी की नजरें 20 जून की समय सीमा और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला विकास परियोजना और धार्मिक स्थल से जुड़े दावों के बीच संतुलन का एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
वाराणसी में काशी रेलवे स्टेशन के विस्तार और मल्टी मॉडल टर्मिनल परियोजना के बीच एक नया विवाद सामने आ गया है। रेलवे प्रशासन ने स्टेशन परिसर के पास स्थित गंज शहीदा मस्जिद को 20 जून तक हटाने का नोटिस जारी किया है। नोटिस के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और मस्जिद प्रबंधन ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है। रेलवे का दावा है कि मस्जिद रेलवे की भूमि पर बनी हुई है और काशी स्टेशन के पुनर्विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न कर रही है। नोटिस में कहा गया है कि यदि निर्धारित समय सीमा तक निर्माण नहीं हटाया गया तो रेलवे प्रशासन कार्रवाई कर सकता है। यह कदम काशी स्टेशन को आधुनिक मल्टी मॉडल टर्मिनल के रूप में विकसित करने की परियोजना के तहत उठाया गया है। दूसरी ओर, मस्जिद से जुड़े पक्षों और अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने नोटिस को भ्रामक बताया है। उनका कहना है कि मस्जिद का इतिहास काफी पुराना है और इसका अस्तित्व रेलवे के आने से पहले का है। कमेटी ने दावा किया है कि वह इस मामले में कानूनी लड़ाई जारी रखेगी और मस्जिद को अवैध बताने के दावे का विरोध करेगी। बताया जा रहा है कि काशी रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास पर 300 करोड़ रुपये से अधिक की लागत खर्च की जा रही है। परियोजना का उद्देश्य रेलवे, बस और जल परिवहन को एकीकृत कर यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इससे पहले भी स्टेशन क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कई संरचनाएं हटाई जा चुकी हैं। फिलहाल सभी की नजरें 20 जून की समय सीमा और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। यह मामला विकास परियोजना और धार्मिक स्थल से जुड़े दावों के बीच संतुलन का एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
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