दूरबीन से ऑपरेशन के बाद बिगड़ी तबीयत, दूसरे ऑपरेशन के बाद गई महिला की जान...
- 9h ago
मथुरा। मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। रोजी-रोटी की तलाश में मध्य प्रदेश से मथुरा आए एक परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब 24 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला अपने पीछे पति और दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों को छोड़ गई।
जानकारी के अनुसार, बेलखेड़ा (मध्य प्रदेश) निवासी आशीष अपनी पत्नी देवका गौड़ (24 वर्ष) और दो मासूम बच्चों के साथ रोजगार की तलाश में मथुरा आए थे। परिवार पिछले चार दिनों से भूतेश्वर रेलवे स्टेशन के आसपास रह रहा था। इसी दौरान देवका गौड़ की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मृतका के पति आशीष ने बताया कि उनके पास न तो बच्चों की देखभाल करने वाला कोई है और न ही पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए पैसे हैं। पत्नी की मौत के बाद दोनों मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था।
इस घटना की जानकारी मिलने पर मथुरा के समाजसेवी रामकिशन जिला अस्पताल पहुंचे और परिवार की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ली। उन्होंने सबसे पहले दोनों बच्चों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था कराई और इसके बाद महिला के पार्थिव शरीर को ध्रुव घाट ले जाकर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया।
इस मार्मिक घटना ने एक ओर गरीब परिवार की बेबसी को उजागर किया, तो दूसरी ओर समाजसेवी रामकिशन की मानवीय पहल ने जरूरतमंद परिवार के लिए संकट की घड़ी में सहारा बनकर मानवता की मिसाल पेश की।
मथुरा। मथुरा के महर्षि दयानंद सरस्वती जिला अस्पताल से मानवता को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। रोजी-रोटी की तलाश में मध्य प्रदेश से मथुरा आए एक परिवार पर उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब 24 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई। महिला अपने पीछे पति और दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों को छोड़ गई। जानकारी के अनुसार, बेलखेड़ा (मध्य प्रदेश) निवासी आशीष अपनी पत्नी देवका गौड़ (24 वर्ष) और दो मासूम बच्चों के साथ रोजगार की तलाश में मथुरा आए थे। परिवार पिछले चार दिनों से भूतेश्वर रेलवे स्टेशन के आसपास रह रहा था। इसी दौरान देवका गौड़ की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतका के पति आशीष ने बताया कि उनके पास न तो बच्चों की देखभाल करने वाला कोई है और न ही पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए पैसे हैं। पत्नी की मौत के बाद दोनों मासूम बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था। इस घटना की जानकारी मिलने पर मथुरा के समाजसेवी रामकिशन जिला अस्पताल पहुंचे और परिवार की पूरी जिम्मेदारी अपने हाथ में ली। उन्होंने सबसे पहले दोनों बच्चों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था कराई और इसके बाद महिला के पार्थिव शरीर को ध्रुव घाट ले जाकर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम संस्कार कराया। इस मार्मिक घटना ने एक ओर गरीब परिवार की बेबसी को उजागर किया, तो दूसरी ओर समाजसेवी रामकिशन की मानवीय पहल ने जरूरतमंद परिवार के लिए संकट की घड़ी में सहारा बनकर मानवता की मिसाल पेश की।
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